Rama Navami

India • March 26, 2026 • Thursday

82
Days
16
Hours
23
Mins
28
Secs
until Rama Navami
Asia/Kolkata timezone

Holiday Details

Holiday Name
Rama Navami
Country
India
Date
March 26, 2026
Day of Week
Thursday
Status
82 days away
About this Holiday
Rama Navami is a Hindu festival that celebrates the birth of Rama, the first son of King Dasaratha of Ayodhya.

About Rama Navami

Also known as: राम नवमी

राम नवमी: भगवान श्री राम के जन्मोत्सव का संपूर्ण विवरण

राम नवमी भारत के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र हिंदू त्योहारों में से एक है। यह पावन पर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। हिंदू धर्म में राम नवमी केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह धर्म की अधर्म पर विजय, सत्य की स्थापना और मानवीय मूल्यों के चरमोत्कर्ष का प्रतीक है। भगवान राम का जीवन 'रामचरितमानस' और 'रामायण' के माध्यम से हमें एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और एक न्यायप्रिय राजा बनने की शिक्षा देता है।

यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है, जो नौ दिनों तक चलने वाले 'चैत्र नवरात्रि' का अंतिम दिन भी होता है। भारत के कोने-कोने में इस दिन एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, भक्त उपवास रखते हैं, मंदिरों में भजन-कीर्तन करते हैं और भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं। विशेष रूप से अयोध्या, जो भगवान राम की जन्मस्थली है, वहां इस उत्सव की भव्यता देखते ही बनती है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत और समाज में नैतिक मूल्यों के पुनरुद्धार का स्मरण कराता है।

2026 में राम नवमी कब है?

वर्ष 2026 में राम नवमी का पावन पर्व Thursday, March 26, 2026 को मनाया जाएगा। वर्तमान समय से इस विशेष दिन के आगमन में अब केवल 82 दिन शेष हैं।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, राम नवमी की तिथि परिवर्तनीय होती है क्योंकि यह चंद्र गणना (लूनर कैलेंडर) पर आधारित होती है। हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ही यह पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 के लिए ज्योतिषीय गणना के अनुसार, नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे प्रारंभ होगी और 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे समाप्त होगी। पूजा के लिए सबसे शुभ समय 'मध्याह्न मुहूर्त' माना जाता है, जो दोपहर 11:13 बजे से दोपहर 01:41 बजे तक रहेगा। इसी समय के दौरान भगवान राम का जन्म हुआ था, इसलिए भक्त इसी कालखंड में विशेष अनुष्ठान और आरती संपन्न करते हैं।

राम नवमी का इतिहास और पौराणिक कथा

राम नवमी का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियाँ थीं—कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी, लेकिन लंबे समय तक उनकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति की कामना के लिए राजा दशरथ ने महर्षि वशिष्ठ की सलाह पर 'पुत्रकामेष्टि यज्ञ' करवाया। यज्ञ के समापन पर अग्नि देव ने प्रकट होकर राजा को दिव्य खीर का पात्र दिया, जिसे रानियों ने ग्रहण किया।

इसके परिणामस्वरूप, चैत्र शुक्ल नवमी के दिन रानी कौशल्या ने भगवान राम को जन्म दिया। इसके बाद रानी कैकेयी ने भरत को और रानी सुमित्रा ने लक्ष्मण व शत्रुघ्न को जन्म दिया। भगवान विष्णु ने रावण के अत्याचारों को समाप्त करने और पृथ्वी पर धर्म की पुनः स्थापना करने के लिए मानव रूप में अवतार लिया था। राम नवमी का उत्सव केवल उनके जन्म की खुशी नहीं है, बल्कि यह उस दैवीय शक्ति के स्वागत का दिन है जिसने संसार को मर्यादा और कर्तव्य का मार्ग दिखाया।

उत्सव और परंपराएं: भारत में कैसे मनाई जाती है राम नवमी?

भारत एक विविधताओं वाला देश है, और यहाँ राम नवमी मनाने के तरीके भी क्षेत्रीय आधार पर भिन्न लेकिन भक्ति भाव में समान होते हैं।

1. व्रत और उपवास

श्रद्धालु इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करते हैं। कई लोग पूरे दिन का उपवास रखते हैं। कुछ भक्त केवल फलों और दूध का सेवन करते हैं (फलाहारी व्रत), जबकि कुछ लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं। उपवास का मुख्य उद्देश्य मन और शरीर की शुद्धि करना है ताकि भक्त पूरी एकाग्रता से ईश्वर की आराधना कर सकें।

2. राम जन्मोत्सव पूजा (मध्याह्न पूजा)

चूंकि भगवान राम का जन्म दोपहर के समय हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा इसी समय की जाती है। घरों और मंदिरों में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराया जाता है और नए वस्त्र व आभूषण पहनाए जाते हैं। पालने में भगवान राम के बाल स्वरूप को रखकर झुलाया जाता है और "भये प्रगट कृपाला, दीनदयाला..." जैसे स्तुति गान किए जाते हैं।

3. रामायण पाठ और भजन-कीर्तन

इस दिन भक्त 'रामचरितमानस' या 'रामायण' का अखंड पाठ करते हैं। मंदिरों में सुंदरकांड का पाठ और सामूहिक भजन-कीर्तन आयोजित किए जाते हैं। "श्री राम जय राम जय जय राम" के मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

4. शोभा यात्रा (जुलूस)

भारत के कई शहरों में भव्य शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं। इन झांकियों में भगवान राम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को दर्शाया जाता है। लोग ढोल-नगाड़ों के साथ सड़कों पर निकलते हैं और जय श्री राम के नारे लगाते हैं। अयोध्या, वाराणसी और सीतामढ़ी जैसे शहरों में ये यात्राएं अत्यंत विशाल होती हैं।

5. पवित्र स्नान

अयोध्या में सरयू नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि राम नवमी के दिन सरयू में डुबकी लगाने से सभी पाप धुल जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार दक्षिण भारत में भी गोदावरी नदी के तट पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।

क्षेत्रीय विविधता: उत्तर से दक्षिण तक का उत्सव

राम नवमी का स्वरूप उत्तर और दक्षिण भारत में थोड़ा भिन्न होता है, जो इसे और भी रोचक बनाता है:

उत्तर भारत (विशेषकर अयोध्या): यहाँ राम नवमी का मुख्य केंद्र अयोध्या है। यहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं। राम जन्मभूमि मंदिर में विशेष उत्सव होता है। कनक भवन और अन्य मंदिरों को फूलों और लाइटों से सजाया जाता है। लोग सरयू नदी में दीपदान करते हैं। दक्षिण भारत (भद्राचलम): तेलंगाना के भद्राचलम मंदिर में इस दिन को 'सीताराम कल्याणम' के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान राम और माता सीता के विवाह का उत्सव है। यहाँ की परंपराएं अत्यंत समृद्ध हैं और इसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है। पूर्वी भारत: पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी राम नवमी के अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है और भक्त जुलूस निकालते हैं।

राम नवमी का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

राम नवमी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह समाज को एकजुट करने का एक माध्यम है। भगवान राम को 'मर्यादा पुरुषोत्तम' कहा जाता है, जिसका अर्थ है वह पुरुष जो मर्यादाओं में रहकर श्रेष्ठ आचरण करता है। उनके जीवन से हमें निम्नलिखित शिक्षाएं मिलती हैं:

  1. सत्य और धर्म: कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ न छोड़ना।
  2. कर्तव्य परायणता: एक पुत्र के रूप में पिता के वचन को निभाने के लिए राजपाट त्याग कर 14 वर्ष के वनवास पर जाना।
  3. समानता: शबरी के जूठे बेर खाकर समाज को यह संदेश देना कि भक्ति में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता।
  4. न्याय: एक राजा के रूप में अपनी प्रजा के सुख-दुख का ध्यान रखना (राम-राज्य की अवधारणा)।
आज के आधुनिक युग में, राम नवमी हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और नैतिक मूल्यों को पुनः जीवित करने की प्रेरणा देती है।

पर्यटकों और आगंतुकों के लिए व्यावहारिक जानकारी

यदि आप 2026 में राम नवमी के दौरान भारत आने की योजना बना रहे हैं, तो निम्नलिखित बातें आपके काम आएंगी:

प्रमुख स्थान: उत्सव का सबसे जीवंत अनुभव लेने के लिए अयोध्या (उत्तर प्रदेश), भद्राचलम (तेलंगाना), रामेश्वरम (तमिलनाडु) या सीतामढ़ी (बिहार) जाएं। इस्कॉन (ISKCON) मंदिरों में भी भव्य आयोजन होते हैं। परिधान और व्यवहार: मंदिरों में जाते समय शालीन कपड़े पहनें (कंधे और घुटने ढके हों)। मंदिर में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल बाहर उतारें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर धैर्य बनाए रखें। परिवहन और आवास: राम नवमी के दौरान अयोध्या जैसे शहरों में भारी भीड़ होती है। अपनी यात्रा और होटल बुकिंग कम से कम 3-4 महीने पहले कर लें। स्थानीय यातायात के लिए ई-रिक्शा और ऑटो उपलब्ध रहते हैं, लेकिन सड़कों पर पैदल चलने वालों की संख्या अधिक हो सकती है। मौसम: मार्च के अंत में भारत के अधिकांश हिस्सों में तापमान बढ़ना शुरू हो जाता है। दिन के समय गर्मी हो सकती है (25°C से 35°C), इसलिए सूती कपड़े पहनें और अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें। सुरक्षा: बड़े जुलूसों और मंदिरों में सुरक्षा जांच कड़ी होती है। अपने साथ भारी बैग या प्रतिबंधित वस्तुएं न ले जाएं।

खान-पान और प्रसाद

राम नवमी के दिन विशेष प्रकार के पकवान और प्रसाद तैयार किए जाते हैं: पंजीरी और चरणामृत: धनिया, चीनी और घी से बनी पंजीरी और दूध-दही का चरणामृत मुख्य प्रसाद होता है। पनाकम: दक्षिण भारत में गुड़, काली मिर्च और पानी से बना एक शीतल पेय 'पनाकम' परोसा जाता है, जो गर्मी में राहत देता है। कोसंभरी: चने की दाल और ककड़ी से बना सलाद भी दक्षिण भारतीय घरों में लोकप्रिय है। भंडारा: कई जगहों पर सामुदायिक भोज (भंडारा) का आयोजन किया जाता है, जहाँ पूरी, सब्जी और हलवा प्रसाद के रूप में सभी को खिलाया जाता है।

क्या राम नवमी पर सार्वजनिक अवकाश होता है?

हाँ, राम नवमी भारत के अधिकांश राज्यों में एक राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) है।

क्या बंद रहता है: केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालय, बैंक, स्कूल और कॉलेज इस दिन बंद रहते हैं। कई निजी कंपनियां भी इस दिन छुट्टी देती हैं। क्या खुला रहता है: सार्वजनिक परिवहन (बसें, ट्रेनें, मेट्रो) चालू रहते हैं, हालांकि रूट में बदलाव हो सकता है। अस्पताल, दवा की दुकानें और आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से काम करती हैं। बाजार और दुकानें खुली रह सकती हैं, लेकिन उत्सव के कारण कुछ क्षेत्रों में दोपहर के समय दुकानें बंद हो सकती हैं।

  • भीड़भाड़: इस दिन मंदिरों के आसपास और प्रमुख बाजारों में अत्यधिक भीड़ की उम्मीद करें। सार्वजनिक परिवहन में भी यात्रियों की संख्या अधिक हो सकती है।
राम नवमी का यह पावन पर्व हमें याद दिलाता है कि चाहे अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, सत्य और धर्म का प्रकाश हमेशा विजयी होता है। भगवान राम का नाम केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। वर्ष 2026 में, आइए हम सब मिलकर इस उत्सव को हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाएं।

Frequently Asked Questions

Common questions about Rama Navami in India

वर्ष 2026 में राम नवमी का पावन पर्व March 26, 2026 को मनाया जाएगा। इस वर्ष यह उत्सव Thursday के दिन पड़ रहा है। आज से इस त्यौहार के आने में अब केवल 82 दिन शेष हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मध्याह्न मुहूर्त, जो पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, सुबह 11:13 बजे से दोपहर 01:41 बजे तक रहेगा।

हाँ, राम नवमी भारत के अधिकांश राज्यों में एक राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) है। उत्तर प्रदेश, बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में इस दिन बैंक, सरकारी कार्यालय और स्कूल बंद रहते हैं। हालांकि, अस्पताल और परिवहन जैसी आवश्यक सेवाएं चालू रहती हैं। स्थानीय स्तर पर अवकाश की पुष्टि के लिए राज्य सरकार के कैलेंडर को देखना उचित रहता है क्योंकि कुछ राज्यों में यह वैकल्पिक अवकाश भी हो सकता है।

राम नवमी भगवान विष्णु के सातवें अवतार, भगवान श्रीराम के जन्म के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। यह त्यौहार अधर्म पर धर्म की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भगवान राम को 'मर्यादा पुरुषोत्तम' कहा जाता है, जिनका जीवन सत्य, कर्तव्य, त्याग और पारिवारिक सद्भाव के आदर्शों को दर्शाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान राम की पूजा करके अपने जीवन से नकारात्मकता को दूर करने और आत्मिक शांति प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

श्रद्धालु इस दिन की शुरुआत सुबह जल्दी स्नान करके और व्रत रखकर करते हैं। घरों और मंदिरों में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्तियों को सजाया जाता है। दोपहर के समय 'राम जन्म मुहूर्त' पर विशेष पूजा की जाती है। लोग रामायण का पाठ करते हैं, भजन-कीर्तन गाते हैं और 'जय श्री राम' के नारे लगाते हैं। कई स्थानों पर भव्य शोभा यात्राएं और झांकियां निकाली जाती हैं। शाम को नदियों के किनारे दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया जाता है।

राम नवमी पर कई लोग पूरे दिन का उपवास रखते हैं, जिसमें केवल फल और दूध का सेवन किया जाता है। पूजा के बाद विशेष प्रसाद वितरित किया जाता है। दक्षिण भारत में 'पानकम' (गुड़ और मसालों का शरबत) और 'कोसंभरी' (दाल का सलाद) बनाने की परंपरा है। उत्तर भारत में हलवा, पूरी और चने का भोग लगाया जाता है। इस दिन पूर्णतः सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है और मांस तथा मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है।

राम नवमी का सबसे भव्य उत्सव अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में मनाया जाता है, जो भगवान राम की जन्मभूमि है। यहाँ सरयू नदी में पवित्र स्नान और राम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन का विशेष महत्व है। इसके अलावा, तेलंगाना का भद्राचलम मंदिर और बिहार का सीतामढ़ी भी प्रमुख केंद्र हैं। देशभर के इस्कॉन (ISKCON) मंदिरों में भी इस दिन विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम और उत्सव आयोजित किए जाते हैं।

त्यौहार के दौरान मंदिरों में भारी भीड़ होती है, इसलिए धैर्य रखना आवश्यक है। आगंतुकों को शालीन कपड़े पहनने चाहिए (कंधे और घुटने ढके हुए) और मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले जूते बाहर उतारने चाहिए। अयोध्या जैसे प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा जांच कड़ी होती है, इसलिए समय से पहले पहुंचना बेहतर है। मार्च के अंत में मौसम गर्म हो जाता है, अतः सूती कपड़े पहनें और अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें।

हाँ, राम नवमी नौ दिनों तक चलने वाले 'चैत्र नवरात्रि' उत्सव का समापन दिवस है। नवरात्रि के अंतिम दिन होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इसके साथ ही, इसके कुछ दिनों बाद सीता नवमी (अप्रैल में) मनाई जाती है। अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से इस त्यौहार का उत्साह और भी बढ़ गया है, जिससे अब यहां श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि देखी जाती है।

Historical Dates

Rama Navami dates in India from 2010 to 2025

Year Day of Week Date
2025 Sunday April 6, 2025
2024 Wednesday April 17, 2024
2023 Thursday March 30, 2023
2022 Sunday April 10, 2022
2021 Wednesday April 21, 2021
2020 Thursday April 2, 2020
2019 Saturday April 13, 2019
2018 Sunday March 25, 2018
2017 Tuesday April 4, 2017
2016 Friday April 15, 2016
2015 Saturday March 28, 2015
2014 Tuesday April 8, 2014
2013 Friday April 19, 2013
2012 Sunday April 1, 2012
2011 Tuesday April 12, 2011
2010 Wednesday March 24, 2010

Note: Holiday dates may vary. Some holidays follow lunar calendars or have different observance dates. Purple indicates weekends.