भारत में रमजान का आगमन: एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा
रमजान, जिसे 'रमजान-उल-मुबारक' के नाम से भी जाना जाता है, इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहाँ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी निवास करती है, रमजान का महीना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह देश की साझा संस्कृति, भाईचारे और आध्यात्मिक शुद्धि का एक जीवंत उत्सव है। यह वह समय है जब भारत के व्यस्त बाजारों की रौनक बदल जाती है, मस्जिदों से गूंजती अजान की आवाजें एक विशेष शांति का अनुभव कराती हैं, और शाम के समय इफ्तार के दस्तरख्वान पर लोग जाति और संप्रदाय की सीमाओं को भूलकर एक साथ बैठते हैं।
रमजान का सार आत्म-अनुशासन, आत्म-नियंत्रण और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण में निहित है। मुस्लिम समुदाय के लिए यह महीना कुरान के अवतरण की याद दिलाता है। मान्यता है कि इसी महीने की एक विशेष रात 'लैलात-अल-कद्र' को पैगंबर मोहम्मद साहब पर अल्लाह का कलाम (पवित्र कुरान) नाजिल हुआ था। भारत में रमजान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ की गंगा-जमुनी तहजीब में गैर-मुस्लिम भाई भी अपने मुस्लिम मित्रों के साथ रोजा इफ्तार में शिरकत करते हैं, जो सामाजिक सद्भाव की एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है। यह महीना इंसान को भूख और प्यास का एहसास कराकर गरीबों और जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति रखना सिखाता है।
भारत के विभिन्न हिस्सों में रमजान को मनाने के तरीके में स्थानीय संस्कृतियों का मेल दिखाई देता है। केरल के मालाबार तट से लेकर कश्मीर की वादियों तक और दिल्ली की पुरानी गलियों से लेकर हैदराबाद के चारमीनार तक, रमजान की छटा निराली होती है। यह महीना केवल उपवास (रोजा) रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झूठ, क्रोध, ईर्ष्या और अन्य बुराइयों से बचने का भी संकल्प है। भारत में रमजान का आगमन एक ऐसी ऊर्जा लेकर आता है जो समाज के हर वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करती है, चाहे वह सहरी के वक्त बजने वाले ढोल हों या इफ्तार के समय बाजारों में मिलने वाले लजीज पकवान।
2026 में रमजान कब है?
भारत में रमजान की शुरुआत चंद्रमा के दर्शन (चांद दिखने) पर निर्भर करती है। चूंकि इस्लामी कैलेंडर चंद्र गणना पर आधारित होता है, इसलिए इसकी तारीखें हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार लगभग 11 दिन पीछे खिसक जाती हैं।
2026 के लिए निर्धारित तिथियां इस प्रकार हैं:
- तारीख: February 19, 2026
- दिन: Thursday
- समय: अब से लगभग 47 दिन शेष हैं।
भारत में रमजान के महीने की शुरुआत की आधिकारिक घोषणा 'मरकजी रुयत-ए-हिलाल कमेटी' (Markazi Ruyat-e-Hilal Committee) द्वारा चांद देखने के बाद की जाती है। यदि मंगलवार, 17 फरवरी, 2026 की शाम को चांद नजर आता है, तो पहला रोजा 18 फरवरी को होगा। अन्यथा, यह 19 फरवरी, 2026 से शुरू होगा। भारत में भौगोलिक विस्तार के कारण, कभी-कभी केरल या तटीय क्षेत्रों में चांद एक दिन पहले दिख जाता है, जबकि उत्तर भारत में यह अगले दिन दिखाई देता है। यह एक परिवर्तनशील (Variable) तिथि है जो पूरी तरह से खगोलीय घटनाओं और स्थानीय समितियों की पुष्टि पर आधारित होती है।
रमजान का इतिहास और धार्मिक महत्व
रमजान का इतिहास इस्लाम के शुरुआती दौर से जुड़ा है। 'रमजान' शब्द अरबी भाषा के 'रमिदा' या 'अर-रमाद' से निकला है, जिसका अर्थ है 'भीषण गर्मी' या 'जला देने वाला'। आध्यात्मिक रूप से इसका अर्थ है कि यह महीना मोमिनों (विश्वास करने वालों) के गुनाहों को जलाकर उन्हें पाक-साफ कर देता है।
इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक 'सौम' (उपवास) है। रमजान के दौरान रोजा रखना हर स्वस्थ बालिग मुस्लिम के लिए अनिवार्य (फर्ज) माना गया है। कुरान के सूरह अल-बकराह में अल्लाह फरमाता है, "ऐ ईमान वालों! तुम पर रोजे फर्ज किए गए हैं, जैसे तुमसे पहले के लोगों पर फर्ज किए गए थे, ताकि तुम परहेजगार (संयमी) बन सको।"
भारत में इस्लाम का आगमन सदियों पहले हुआ था, और तब से ही रमजान की परंपराएं भारतीय मिट्टी में रच-बस गई हैं। मुगलों के शासनकाल के दौरान रमजान को शाही संरक्षण मिला, जिससे पुरानी दिल्ली, लखनऊ और हैदराबाद जैसे शहरों में इफ्तार और सहरी की विशेष संस्कृतियां विकसित हुईं। आज भारत का मुस्लिम समुदाय, जो मुख्य रूप से सुन्नी और शिया समूहों में बंटा है, समान श्रद्धा के साथ इस महीने को मनाता है। यह समय कुरान की तिलावत (पठन), जकात (दान) और तरावीह (विशेष नमाज) के माध्यम से आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छूने का अवसर प्रदान करता है।
भारत में रमजान की दैनिक दिनचर्या और परंपराएं
भारत में रमजान का दिन बहुत ही व्यवस्थित और आध्यात्मिक रूप से व्यस्त होता है। इसकी शुरुआत सूरज निकलने से काफी पहले होती है और चाँद ढलने के बाद तक चलती है।
1. सहरी (Suhoor)
सहरी वह भोजन है जो सूर्योदय से पहले, यानी फज्र की अजान से पहले किया जाता है। भारत में सहरी का एक अलग ही उत्साह होता है। उत्तर भारत के कई कस्बों में आज भी 'सहरी जगाने वाले' टोली बनाकर निकलते हैं, जो ढोल बजाकर या नात पढ़कर लोगों को जगाते हैं। सहरी के खाने में आमतौर पर ऐसी चीजें शामिल की जाती हैं जो दिन भर ऊर्जा प्रदान करें। उत्तर भारत में लोग फेनी, दूध-जलेबी, परांठे और दही खाना पसंद करते हैं, जबकि दक्षिण भारत में कांजी (चावल का दलिया) का प्रचलन है।
2. रोजा (Sawm)
सहरी के बाद रोजे की नीयत की जाती है और दिन भर कुछ भी खाने या पीने (यहाँ तक कि पानी भी नहीं) से परहेज किया जाता है। लेकिन रोजा केवल भूखा रहना नहीं है। एक रोजेदार के लिए जरूरी है कि वह अपनी आंखों, कानों और जुबान का भी रोजा रखे—अर्थात न बुरा देखे, न बुरा सुने और न ही बुरा बोले। भारत की चिलचिलाती गर्मी (जो अक्सर रमजान के दौरान होती है, हालांकि 2026 में मौसम सुहावना रहेगा) में रोजा रखना धैर्य की एक बड़ी परीक्षा होती है।
3. इफ्तार (Iftar)
सूर्यास्त के समय मगरीब की अजान के साथ रोजा खोला जाता है, जिसे इफ्तार कहते हैं। भारत में इफ्तार एक सामाजिक उत्सव जैसा होता है। लोग मस्जिदों में इकट्ठा होते हैं या अपने परिवारों के साथ बैठते हैं। सुन्नत के अनुसार रोजा खजूर और पानी से खोला जाता है। इसके बाद भारतीय इफ्तार की मेज पर व्यंजनों की भरमार होती है:
- पकौड़े और समोसे: उत्तर भारत में बेसन के पकौड़े और कीमा समोसे अनिवार्य हैं।
- फलों की चाट: ताजे फलों का मिश्रण।
- रूह अफजा या शरबत: प्यास बुझाने के लिए गुलाब का शरबत।
- हैदराबादी हलीम: हैदराबाद में रमजान के दौरान हलीम (दाल, मांस और मसालों का मिश्रण) सबसे लोकप्रिय व्यंजन है।
- नॉन-वेज व्यंजन: शाम के भोजन में बिरयानी, कबाब और कोरमा मुख्य रूप से परोसे जाते हैं।
4. तरावीह (Taraweeh)
ईशा की नमाज (रात की आखिरी नमाज) के बाद एक विशेष नमाज पढ़ी जाती है जिसे तरावीह कहते हैं। इसमें पूरे महीने के दौरान कुरान का पाठ पूरा किया जाता है। भारत की मस्जिदों में रात के 9 बजे से 11 बजे तक तरावीह की रौनक रहती है। बच्चे, बूढ़े और जवान सभी सफेद कुर्ते-पायजामे और टोपी पहनकर मस्जिदों की ओर जाते हैं।
5. जकात और खैरात (Charity)
रमजान दान का महीना है। हर संपन्न मुसलमान अपनी संपत्ति का एक निश्चित हिस्सा (2.5%) गरीबों को दान करता है, जिसे 'जकात' कहते हैं। इसके अलावा 'सदका' और 'फितरा' भी दिया जाता है ताकि समाज का गरीब तबका भी ईद की खुशियों में शामिल हो सके। भारत में रमजान के दौरान बड़े पैमाने पर लंगर और मुफ्त इफ्तार का आयोजन किया जाता है।
भारत के प्रमुख शहरों में रमजान की झलक
भारत की विविधता रमजान के दौरान स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। हर शहर का अपना एक अलग अंदाज है:
- पुरानी दिल्ली (जामा मस्जिद क्षेत्र): यहाँ की गलियां रात भर जागती हैं। मटिया महल और चांदनी चौक में कबाब और फिरनी की खुशबू फैली रहती है। जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर होने वाला सामूहिक इफ्तार दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
- हैदराबाद (चारमीनार): यहाँ रमजान का मतलब 'हलीम' और 'ईरानी चाय' है। चारमीनार के आसपास के बाजार रात भर खुले रहते हैं जहाँ लोग चूड़ियां, कपड़े और इत्र की खरीदारी करते हैं।
- लखनऊ: नवाबों के शहर में इफ्तार बहुत ही नफासत के साथ किया जाता है। यहाँ के 'टुंडे कबाबी' और विशेष 'शीर्मल' रमजान के दौरान काफी पसंद किए जाते हैं।
- केरल: यहाँ रमजान को 'रामदान' कहा जाता है। यहाँ के इफ्तार में स्थानीय मसालों और नारियल का प्रभाव होता है। 'पथरी' (चावल की रोटी) और मांस के व्यंजन यहाँ की खासियत हैं।
- कश्मीर: घाटी में सहरी के समय 'सहरख्वानी' (पारंपरिक गायक) लोगों को जगाते हैं। यहाँ का 'वाज़वान' इफ्तार के समय एक खास अनुभव देता है।
पर्यटकों और गैर-मुस्लिमों के लिए व्यावहारिक जानकारी
यदि आप रमजान के दौरान भारत में हैं या किसी मुस्लिम मित्र के साथ इस उत्सव को साझा करना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- सम्मानजनक व्यवहार: दिन के समय सार्वजनिक स्थानों पर रोजेदारों के सामने खाने-पीने या धूम्रपान करने से बचना एक अच्छा शिष्टाचार माना जाता है।
- वेशभूषा: मस्जिदों या मुस्लिम बहुल इलाकों में जाते समय शालीन कपड़े पहनें। महिलाओं के लिए सिर ढकना (मस्जिद के अंदर) और कंधे व घुटने ढके होना उचित है।
- अभिवादन: आप अपने मित्रों को "रमजान मुबारक" या "रमजान करीम" कहकर शुभकामनाएं दे सकते हैं।
- इफ्तार का निमंत्रण: यदि आपको किसी भारतीय परिवार द्वारा इफ्तार पर आमंत्रित किया जाता है, तो उसे स्वीकार करना सम्मान की बात मानी जाती है। अपने साथ मिठाई या फल ले जाना एक अच्छा संकेत है।
- बाजारों की भीड़: शाम के समय पुराने शहरों के बाजारों में भारी भीड़ हो सकती है। यदि आप खरीदारी करना चाहते हैं, तो दोपहर के समय जाएं या फिर देर रात के माहौल का आनंद लें।
- समय का ध्यान: रमजान के दौरान सरकारी दफ्तरों और कुछ निजी संस्थानों में मुस्लिम कर्मचारियों के लिए काम के घंटे थोड़े कम या लचीले हो सकते हैं।
भारत में रमजान के दौरान पर्यटन के आकर्षण
रमजान का महीना भारत की सांस्कृतिक विरासत को देखने का एक अनूठा अवसर है। पर्यटकों के लिए कुछ विशेष अनुभव:
- फूड वॉक: दिल्ली, मुंबई (मोहम्मद अली रोड) और हैदराबाद में 'रमजान फूड वॉक' आयोजित की जाती हैं। यहाँ आप पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं जो साल के अन्य समय में दुर्लभ होते हैं।
- फोटोग्राफी: जामा मस्जिद या मक्का मस्जिद (हैदराबाद) में नमाज के दृश्य और शाम के समय बाजारों की रोशनी फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग के समान है।
- खरीदारी: रमजान के आखिरी दस दिनों में बाजारों में जबरदस्त रौनक होती है। इत्र, हस्तशिल्प, कढ़ाई वाले कपड़े और सूखे मेवे खरीदने का यह सबसे अच्छा समय है।
- आध्यात्मिक शांति: शाम के समय मस्जिदों से आती अजान और तरावीह की आवाजें एक अलग ही शांति प्रदान करती हैं।
रमजान का समापन: ईद-उल-फितर की ओर
रमजान का महीना 29 या 30 दिनों का होता है। इसका समापन 'ईद-उल-फितर' के साथ होता है। रमजान के आखिरी दस दिन सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जिनमें 'एतिकाफ' (मस्जिद में एकांतवास) और 'लैलात-अल-कद्र' (शक्ति की रात) शामिल हैं। 2026 में ईद-उल-फितर के 18 या 19 मार्च के आसपास होने की संभावना है।
भारत में ईद का इंतजार चांद के दीदार के साथ खत्म होता है, जिसे 'चांद रात' कहा जाता है। उस रात बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं होती। महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाती हैं और पुरुष नए कपड़े सिलवाते हैं। ईद के दिन सुबह की विशेष नमाज के बाद लोग एक-दूसरे के गले मिलते हैं और 'सेवइयां' (मीठी डिश) खिलाकर मुंह मीठा कराते हैं।
क्या रमजान के दौरान सार्वजनिक अवकाश होता है?
एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या रमजान के दौरान भारत में छुट्टियां होती हैं?
- राष्ट्रीय अवकाश: भारत में रमजान के पूरे महीने के लिए कोई राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश नहीं होता है। सभी सरकारी कार्यालय, स्कूल, कॉलेज और बैंक सामान्य रूप से खुले रहते हैं।
- ईद-उल-फितर: रमजान के अंत में होने वाली ईद-उल-फितर के दिन पूरे भारत में अनिवार्य सार्वजनिक अवकाश होता है।
- स्थानीय प्रभाव: हालांकि छुट्टियां नहीं होतीं, लेकिन मुस्लिम बहुल इलाकों में व्यापारिक प्रतिष्ठान दोपहर में बंद हो सकते हैं और शाम को देर तक खुले रह सकते हैं। 2026 में, रमजान की शुरुआत (19 फरवरी) 'शिवाजी जयंती' के साथ पड़ रही है, जो महाराष्ट्र जैसे राज्यों में एक सार्वजनिक अवकाश है।
- कार्यस्थल: कई निजी कंपनियां अपने मुस्लिम कर्मचारियों को सहरी और इफ्तार के समय के अनुसार काम के घंटों में छूट प्रदान करती हैं।
निष्कर्ष
भारत में रमजान केवल एक धार्मिक महीना नहीं है, बल्कि यह देश की 'अनेकता में एकता' का प्रतीक है। यह वह समय है जब भारत अपनी पूरी सांस्कृतिक भव्यता के साथ उभरता है। उपवास की कठोरता और इफ्तार का आनंद, दान की भावना और प्रार्थना की शांति—ये सभी तत्व मिलकर एक ऐसा अनुभव बनाते हैं जो न केवल मुसलमानों के लिए बल्कि हर भारतीय के लिए विशेष होता है।
2026 का रमजान भारत में वसंत के आगमन के साथ होगा, जिससे मौसम सुहावना रहेगा और इबादत का आनंद दोगुना हो जाएगा। चाहे आप एक श्रद्धालु हों, एक पर्यटक हों या केवल संस्कृति प्रेमी, भारत में रमजान का अनुभव आपकी स्मृतियों में हमेशा के लिए अंकित हो जाएगा। "रमजान मुबारक!"