Holi

India • March 4, 2026 • Wednesday

60
Days
16
Hours
24
Mins
48
Secs
until Holi
Asia/Kolkata timezone

Holiday Details

Holiday Name
Holi
Country
India
Date
March 4, 2026
Day of Week
Wednesday
Status
60 days away
About this Holiday
Holi is a spring festival of colors celebrated by Hindus, Sikhs and others. It celebrates the triumph of good over evil and the upcoming season of spring. The festival can last up to sixteen days.

About Holi

Also known as: होली

होली: रंगों, प्रेम और उल्लास का महापर्व

होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की उस जीवंत आत्मा का प्रतीक है जो एकता, भाईचारे और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है। इसे 'रंगों का त्योहार' या 'वसंतोत्सव' भी कहा जाता है क्योंकि यह सर्दियों की विदाई और वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करता है। भारत के हर कोने में, चाहे वह उत्तर का मैदान हो या दक्षिण का पठार, होली की गूंज हर जगह सुनाई देती है। यह एक ऐसा समय है जब समाज के सभी बंधन टूट जाते हैं, ऊंच-नीच का भेदभाव मिट जाता है और लोग एक-दूसरे को रंगों में सराबोर कर केवल मानवता का उत्सव मनाते हैं।

इस त्योहार की विशेषता इसकी ऊर्जा और उल्लास में निहित है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व दो दिनों का होता है। पहले दिन 'होलिका दहन' के माध्यम से नकारात्मकता को जलाकर भस्म किया जाता है, और दूसरे दिन 'धुलेंडी' या 'रंगवाली होली' के रूप में खुशियों के रंग बिखेरे जाते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्ता रखता है, बल्कि यह कृषि चक्र से भी जुड़ा है, क्योंकि इस समय किसान अपनी नई फसल (रबी की फसल) को देखकर आनंदित होते हैं। गुलाल की महक, ढोल की थाप और 'होली है' के शोर के बीच, हर भारतीय का हृदय खुशी से नाच उठता है।

भारत में होली का सांस्कृतिक महत्व इतना गहरा है कि यह केवल हिंदुओं तक सीमित नहीं रह गया है। आज यह एक वैश्विक उत्सव बन चुका है जहाँ विभिन्न धर्मों और देशों के लोग आकर भारत की इस सतरंगी विरासत का हिस्सा बनते हैं। यह क्षमा करने और पुराने गिले-शिकवे भुलाकर नए सिरे से रिश्तों की शुरुआत करने का दिन है। पकवानों की खुशबू, विशेष रूप से गुझिया और ठंडाई, इस उत्सव के आनंद को दोगुना कर देती है।

2026 में होली कब है?

वर्ष 2026 में होली का मुख्य उत्सव March 4, 2026 को मनाया जाएगा।

मुख्य तिथि: March 4, 2026 दिन: Wednesday समय सीमा: अब से इस महापर्व में मात्र 60 दिन शेष हैं।

होली की तिथि हिंदू चंद्र कैलेंडर (पंचांग) पर आधारित होती है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। यह आमतौर पर फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में पड़ती है। वर्ष 2026 में, फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी। इसी कारण, होलिका दहन 3 मार्च 2026 (मंगलवार) की शाम को किया जाएगा और रंगों वाली मुख्य होली 4 मार्च 2026 (बुधवार) को खेली जाएगी।

होली का इतिहास और पौराणिक कथाएं

होली के पीछे कई प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं, जो इस त्योहार को गहरा आध्यात्मिक अर्थ प्रदान करती हैं। इनमें सबसे प्रमुख कथा 'भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप' की है।

भक्त प्रह्लाद और होलिका दहन

प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक शक्तिशाली लेकिन अहंकारी असुर राजा था। वह चाहता था कि हर कोई केवल उसकी पूजा करे, लेकिन उसका अपना पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार भगवान ने उसकी रक्षा की। अंत में, राजा ने अपनी बहन 'होलिका' को बुलाया, जिसे वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गई। लेकिन चमत्कार स्वरूप, प्रह्लाद की भक्ति के कारण वह बच गया और होलिका आग में जलकर राख हो गई। यह घटना संदेश देती है कि ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और सच्चाई की हमेशा जीत होती है।

राधा-कृष्ण का प्रेम

मथुरा और वृंदावन की होली भगवान कृष्ण और राधा के दिव्य प्रेम को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कृष्ण अपने सांवले रंग को लेकर चिंतित थे और राधा के गोरे रंग से ईर्ष्या करते थे। उनकी माता यशोदा ने उन्हें सुझाव दिया कि वे राधा के चेहरे पर वह रंग लगा दें जो उन्हें पसंद हो। कृष्ण ने वैसा ही किया और यहीं से रंगों से खेलने की परंपरा शुरू हुई। आज भी ब्रज की होली पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, जहाँ प्रेम और भक्ति के रंग बरसते हैं।

कामदेव का पुनर्जन्म

दक्षिण भारत में एक अन्य कथा प्रचलित है, जिसके अनुसार भगवान शिव के क्रोध से भस्म हुए कामदेव को उनकी पत्नी रति की प्रार्थना पर इसी दिन पुनर्जीवित किया गया था। इस खुशी में लोग खुशियां मनाते हैं।

उत्सव का स्वरूप: कैसे मनाई जाती है होली?

होली का उत्सव मुख्य रूप से दो चरणों में संपन्न होता है, और प्रत्येक चरण का अपना एक विशेष महत्व और विधि है।

1. होलिका दहन (छोटी होली)

होली से एक दिन पहले शाम को होलिका दहन किया जाता है। लोग मोहल्लों के चौराहों या खुले मैदानों में लकड़ी, सूखे पत्तों और गोबर के उपलों का ढेर लगाते हैं। शुभ मुहूर्त (जो 2026 में शाम 6:22 से 8:50 के बीच होगा) में पूजा-अर्चना के बाद इसमें आग लगाई जाती है। लोग आग के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और अपनी बुराइयों व नकारात्मकता को इस अग्नि में समर्पित करने का संकल्प लेते हैं। नई फसल की बालियों (जैसे गेहूं और चना) को भी इस पवित्र अग्नि में भूना जाता है, जिसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

2. धुलेंडी या रंगवाली होली

अगली सुबह रंगों का सैलाब उमड़ पड़ता है। बच्चे, बूढ़े और जवान सभी अपनी टोलियां बनाकर सड़कों पर निकल पड़ते हैं। इस दिन की कुछ खास बातें निम्नलिखित हैं:
रंग और गुलाल: लोग एक-दूसरे के गालों पर अबीर और गुलाल लगाते हैं। सूखे रंगों के साथ-साथ गीले रंगों का भी भरपूर प्रयोग होता है। पानी की बौछारें: पिचकारियों और पानी के गुब्बारों से लोग एक-दूसरे को भिगोते हैं। कई जगहों पर बड़े-बड़े टबों में रंगीन पानी भरा जाता है। संगीत और नृत्य: ढोल-नगाड़ों की थाप पर 'फाग' (लोक गीत) गाए जाते हैं। आधुनिक समय में बॉलीवुड के होली गीतों पर थिरकना एक आम दृश्य है। भांग का आनंद: होली और भांग का गहरा संबंध है। ठंडाई में भांग मिलाकर पीने की परंपरा विशेष रूप से उत्तर भारत में लोकप्रिय है, जिसे शिव का प्रसाद माना जाता है।

क्षेत्रीय विविधताएं: भारत के अलग-अलग रंग

भारत के विशाल भूगोल में होली को मनाने के तरीके भी उतने ही विविध हैं:

ब्रज की लठमार होली (बरसाना और नंदगांव): यहाँ महिलाएं पुरुषों को लाठियों से मारती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं। यह कृष्ण-राधा की लीलाओं का जीवंत रूप है। बंगाल की डोल जात्रा: यहाँ इसे 'बसंत उत्सव' के रूप में मनाया जाता है। शांतिनिकेतन में छात्र पीले वस्त्र पहनकर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। महाराष्ट्र की रंगपंचमी: यहाँ होली के पांचवें दिन रंगों का बड़ा उत्सव होता है। मछुआरा समुदाय (कोली) के लिए यह विशेष महत्व रखता है। पंजाब का होला मोहल्ला: सिखों के लिए यह वीरता का प्रदर्शन करने का समय होता है। आनंदपुर साहिब में निहंग सिख घुड़सवारी और तलवारबाजी के जौहर दिखाते हैं। गोवा का शिगमो: यह गोवा का प्रमुख हिंदू लोक उत्सव है, जिसमें बड़े जुलूस और झांकियां निकाली जाती हैं।

मुख्य पकवान: स्वाद की मिठास

त्योहार का आनंद भोजन के बिना अधूरा है। होली पर विशेष रूप से बनाए जाने वाले व्यंजन हैं:

  1. गुझिया: मावा, ड्राई फ्रूट्स और चीनी से भरी हुई मैदे की तली हुई मिठाई। इसके बिना होली अधूरी मानी जाती है।
  2. ठंडाई: दूध, बादाम, केसर और मसालों से बना एक शीतल पेय।
  3. मालपुआ और रबड़ी: मीठे पैनकेक जिन्हें चाशनी में डुबोकर रबड़ी के साथ परोसा जाता है।
  4. दही भल्ला और कांजी वड़ा: चटपटे और पाचक व्यंजन जो भारी भोजन के बाद राहत देते हैं।

पर्यटकों के लिए व्यावहारिक सुझाव और सावधानियां

यदि आप 2026 में भारत में होली मनाने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

पहनावा: पुराने सूती सफेद कपड़े पहनें। सफेद रंग पर अन्य रंग बहुत सुंदर लगते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि ये कपड़े रंगों से पूरी तरह खराब हो सकते हैं। त्वचा और बालों की सुरक्षा: रंगों से खेलने से पहले अपने शरीर और बालों पर नारियल या सरसों का तेल अच्छी तरह लगाएं। इससे रंग छुड़ाना आसान होगा। आंखों की सुरक्षा के लिए धूप का चश्मा पहनें। प्राकृतिक रंगों का उपयोग: रासायनिक रंगों के बजाय हर्बल या प्राकृतिक गुलाल (जैसे हल्दी, फूलों से बने रंग) का उपयोग करें ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे। समय का ध्यान: होली की मस्ती सुबह 8-9 बजे शुरू हो जाती है और दोपहर 1-2 बजे तक चरम पर होती है। उसके बाद लोग स्नान करके विश्राम करते हैं। भीड़भाड़ से बचें: यदि आप अकेले यात्रा कर रहे हैं या पहली बार आए हैं, तो सार्वजनिक स्थानों पर बहुत ज्यादा भीड़ से बचें। किसी स्थानीय दोस्त या प्रतिष्ठित होटल द्वारा आयोजित होली पार्टी में शामिल होना सुरक्षित और सुखद होता है। परिवहन: होली के दिन सार्वजनिक परिवहन (बस, ऑटो, मेट्रो) या तो बंद रहते हैं या बहुत कम चलते हैं। अपनी यात्राओं की योजना पहले से बना लें।

क्या होली पर सार्वजनिक अवकाश होता है?

हाँ, होली भारत में एक अनिवार्य सार्वजनिक अवकाश है।

सरकारी कार्यालय और स्कूल: भारत के लगभग सभी राज्यों में होली (धुलेंडी) के दिन सरकारी कार्यालय, स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय पूरी तरह बंद रहते हैं। बैंक: भारतीय रिजर्व बैंक के कैलेंडर के अनुसार, अधिकांश राज्यों में बैंक बंद रहते हैं। व्यवसाय और बाजार: स्थानीय बाजार और निजी दुकानें दोपहर तक बंद रहती हैं। शाम को कुछ दुकानें खुल सकती हैं, लेकिन मुख्य व्यावसायिक गतिविधियां ठप रहती हैं। परिवहन: भारतीय रेलवे और हवाई सेवाएं जारी रहती हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर टैक्सियों और सार्वजनिक बसों की उपलब्धता बहुत कम हो जाती है।

होली एक ऐसा अवसर है जो हमें सिखाता है कि जीवन में रंगों का होना कितना जरूरी है। यह हमें प्रकृति से जोड़ता है और समाज में समरसता लाता है। जब आप 2026 में March 4, 2026 को होली खेलें, तो याद रखें कि असली रंग खुशी और प्रेम का है।

बुरा न मानो, होली है!

Frequently Asked Questions

Common questions about Holi in India

वर्ष 2026 में होली का मुख्य उत्सव यानी रंगवाली होली March 4, 2026, Wednesday को मनाई जाएगी। अब इस उत्सव में केवल 60 दिन शेष हैं। इससे एक दिन पहले, 3 मार्च की शाम को होलिका दहन किया जाएगा, जिसका शुभ मुहूर्त शाम 6:22 से रात 8:50 बजे तक रहेगा। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक चलेगी, जिसके बाद रंगों का यह पावन त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

हाँ, होली भारत के अधिकांश राज्यों में एक आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश है। इस दिन सभी सरकारी कार्यालय, स्कूल, कॉलेज और बैंक बंद रहते हैं। कुछ राज्यों में होलिका दहन (छोटी होली) के दिन भी छुट्टी दी जाती है। चूंकि यह एक बहुत बड़ा उत्सव है, इसलिए सार्वजनिक परिवहन सीमित हो सकता है और बाजारों में दुकानें बंद रह सकती हैं। पर्यटकों और यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा की योजना इसी अनुसार बनाएं क्योंकि सड़कों पर भारी भीड़ और उत्सव का माहौल रहता है।

होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह मुख्य रूप से भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद की रक्षा और राक्षसी होलिका के दहन की कथा से जुड़ा है। इसके अलावा, यह पर्व भगवान कृष्ण और राधा के निस्वार्थ प्रेम का सम्मान करता है। सांस्कृतिक रूप से, होली सर्दियों की समाप्ति और वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करने के साथ-साथ अच्छी फसल की खुशी मनाने का अवसर है। यह त्योहार लोगों के बीच आपसी मतभेद मिटाने, क्षमा करने और भाईचारे को बढ़ावा देने का संदेश देता है।

होलिका दहन होली के मुख्य दिन से एक शाम पहले मनाया जाता है। लोग सामुदायिक स्थानों या चौराहों पर लकड़ी और उपलों का ढेर लगाकर बड़ी अलाव जलाते हैं। यह अनुष्ठान भक्त प्रहलाद की आग से सुरक्षित वापसी और होलिका के अंत की याद में किया जाता है। लोग अग्नि की परिक्रमा करते हैं, पूजा करते हैं और अपनी बुराइयों व नकारात्मकता को अग्नि में समर्पित करने की प्रार्थना करते हैं। यह शुद्धि और आध्यात्मिक नवीनीकरण का प्रतीक माना जाता है, जिससे समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

रंगवाली होली के दिन लोग सड़कों और घरों के बाहर निकलकर एक-दूसरे पर गुलाल और रंगीन पानी डालते हैं। बच्चे पिचकारियों और पानी के गुब्बारों से खेलते हैं। इस दिन नीले, लाल, हरे और पीले जैसे विभिन्न रंगों का उपयोग किया जाता है, जिनमें से प्रत्येक का अपना महत्व है। लोग ढोल की थाप पर नाचते हैं, होली के पारंपरिक लोक गीत गाते हैं और 'भांग' युक्त ठंडाई का आनंद लेते हैं। यह दिन सामाजिक बंधनों को तोड़ने और ऊंच-नीच का भेद मिटाकर खुशी साझा करने का होता है।

होली का त्योहार स्वादिष्ट व्यंजनों के बिना अधूरा है। इस अवसर पर 'गुझिया' सबसे मुख्य मिठाई है, जो खोया और सूखे मेवों से भरी तली हुई डंपलिंग होती है। इसके साथ ही लोग ठंडाई (एक शीतल पेय), मालपुआ, दही भल्ले, पूरन पोली और नमकीन स्नैक्स का आनंद लेते हैं। शाम को जब लोग रंग खेलकर नहा-धो लेते हैं, तो वे नए कपड़े पहनकर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के घर जाते हैं, जहाँ इन मिठाइयों और पकवानों के साथ एक-दूसरे का स्वागत किया जाता है।

होली का सबसे भव्य अनुभव उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन में मिलता है, जहाँ भगवान कृष्ण की याद में 16 दिनों तक उत्सव चलता है। बरसाना की 'लठमार होली' बहुत प्रसिद्ध है जहाँ महिलाएँ पुरुषों को लाठियों से मारती हैं। राजस्थान के पुष्कर और जयपुर में शाही और सांस्कृतिक होली का आनंद लिया जा सकता है। दिल्ली में आधुनिक संगीत और पार्टियों का माहौल होता है। शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल) में 'बसंत उत्सव' के रूप में इसे बहुत ही शालीन और सांस्कृतिक तरीके से मनाया जाता है।

पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे होली खेलते समय पुराने सफेद सूती कपड़े पहनें क्योंकि रंग स्थायी दाग छोड़ सकते हैं। त्वचा और बालों को रंगों से बचाने के लिए पहले से तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं और धूप का चश्मा पहनें। केवल प्राकृतिक या जैविक गुलाल का उपयोग करने का प्रयास करें। भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुबह जल्दी निकलें और दोपहर तक वापस लौट आएं क्योंकि उसके बाद उत्सव काफी अराजक हो सकता है। हाइड्रेटेड रहें और अजनबियों के साथ खेलते समय अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें। अधिकांश समारोह दोपहर 1 बजे तक समाप्त हो जाते हैं।

Historical Dates

Holi dates in India from 2010 to 2025

Year Day of Week Date
2025 Friday March 14, 2025
2024 Monday March 25, 2024
2023 Wednesday March 8, 2023
2022 Friday March 18, 2022
2021 Monday March 29, 2021
2020 Tuesday March 10, 2020
2019 Thursday March 21, 2019
2018 Friday March 2, 2018
2017 Monday March 13, 2017
2016 Thursday March 24, 2016
2015 Friday March 6, 2015
2014 Monday March 17, 2014
2013 Wednesday March 27, 2013
2012 Thursday March 8, 2012
2011 Sunday March 20, 2011
2010 Monday March 1, 2010

Note: Holiday dates may vary. Some holidays follow lunar calendars or have different observance dates. Purple indicates weekends.