भारत में फसह (पासओवर) का पहला दिन: एक विस्तृत मार्गदर्शिका
पासओवर, जिसे हिब्रू में 'पेसाच' कहा जाता है, यहूदी धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहाँ विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का संगम होता है, पासओवर का उत्सव भारतीय यहूदी समुदायों की समृद्ध विरासत और उनकी अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। यह त्योहार गुलामी से मुक्ति, स्वतंत्रता की जीत और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का समय है। भारत में रहने वाले बेने इजरायल, कोचीन यहूदी और बगदादी यहूदी समुदायों के लिए यह दिन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का एक माध्यम है।
पासओवर का मूल अर्थ 'छोड़ देना' या 'आगे बढ़ जाना' है। यह उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है जब प्राचीन मिस्र में यहूदियों को दासता से मुक्ति मिली थी। बाइबिल की कहानियों के अनुसार, जब ईश्वर ने मिस्र पर दस विपत्तियाँ भेजी थीं, तो उन्होंने यहूदियों के घरों को 'पासओवर' यानी छोड़ दिया था, जिससे वे सुरक्षित रहे और अंततः मूसा के नेतृत्व में लाल सागर पार कर स्वतंत्र हुए। भारत में, यह त्योहार वसंत ऋतु के दौरान आता है, जो नवीनीकरण और नई शुरुआत का संदेश देता है।
भारत में इस त्योहार की विशेषता यह है कि यहाँ का यहूदी समुदाय अपनी धार्मिक परंपराओं को भारतीय संस्कृति के साथ खूबसूरती से संजोए हुए है। भले ही यह एक छोटा समुदाय है, लेकिन उनके उत्सव की गहराई और श्रद्धा अद्वितीय है। फसह का पहला दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी दिन मुख्य अनुष्ठान और 'सेडर' भोजन आयोजित किया जाता है, जो परिवार के सदस्यों को एक सूत्र में बांधता है।
2026 में फसह कब है?
वर्ष 2026 में, पासओवर या फसह का पहला दिन Thursday, April 2, 2026 को मनाया जाएगा।
वर्तमान समय से इस महत्वपूर्ण त्योहार के आने में अब केवल 89 दिन शेष हैं। यह गणना 31 दिसंबर, 2025 के संदर्भ में की गई है, जो यह दर्शाती है कि यहूदी समुदाय के लिए तैयारियों का समय अब करीब आ रहा है।
पासओवर की तिथि हर साल बदलती रहती है क्योंकि यह यहूदी चंद्र कैलेंडर (Hebrew Calendar) पर आधारित होती है। यह आमतौर पर 'निसान' महीने की 15वीं तारीख को शुरू होता है। चूंकि चंद्र कैलेंडर और सौर कैलेंडर (ग्रेगोरियन कैलेंडर) में अंतर होता है, इसलिए इसकी तारीखें हर साल मार्च या अप्रैल के महीने में अलग-अलग पड़ती हैं। यह एक गतिशील तिथि वाला त्योहार है, जो चंद्रमा की स्थिति के अनुसार निर्धारित होता है।
इतिहास और उत्पत्ति: मिस्र से भारत तक का सफर
पासओवर का इतिहास हजारों साल पुराना है और इसका वर्णन 'एक्सोडस' (Exodus) की पुस्तक में मिलता है। मिस्र के फिरौन की गुलामी से इजरायलियों की मुक्ति की कहानी इस त्योहार का केंद्र है। जब फिरौन ने यहूदियों को आजाद करने से इनकार कर दिया, तब ईश्वर ने मिस्र पर दस भयानक विपत्तियाँ भेजीं। अंतिम विपत्ति में, प्रत्येक मिस्रवासी के पहलौठे पुत्र की मृत्यु होनी थी, लेकिन यहूदियों को अपने दरवाजों पर मेमने के रक्त से निशान लगाने का निर्देश दिया गया था ताकि मृत्यु का दूत उनके घरों को छोड़ दे। इसी "छोड़ देने" की घटना से 'पासओवर' नाम पड़ा।
भारत में यहूदी समुदाय का इतिहास भी उतना ही प्राचीन और रोचक है। माना जाता है कि बेने इजरायल समुदाय लगभग 2,000 साल पहले कोंकण तट पर पहुंचा था। उन्होंने अपनी धार्मिक पहचान को बनाए रखा और भारतीय समाज का हिस्सा बन गए। कोचीन के यहूदी और बाद में आए बगदादी यहूदियों ने भी भारत को अपना घर बनाया। इन समुदायों के लिए पासओवर केवल एक विदेशी कहानी नहीं है, बल्कि यह उनकी अपनी पहचान का हिस्सा है। भारत की मिट्टी में रहते हुए भी उन्होंने अपनी प्राचीन परंपराओं को जीवित रखा है, जो उनकी सांस्कृतिक दृढ़ता को दर्शाता है।
उत्सव और परंपराएं: सेडर भोजन की महत्ता
पासओवर के उत्सव की शुरुआत वास्तव में त्योहार की पूर्व संध्या पर होती है। भारत में यहूदी परिवार अपने घरों की गहन सफाई करते हैं। इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण नियम 'खामेट्ज़' (Chametz) यानी खमीर वाले भोजन का त्याग करना है।
1. खामेट्ज़ का त्याग और मात्ज़ोह:
फसह के दौरान सात दिनों तक किसी भी ऐसी चीज़ का सेवन नहीं किया जाता जिसमें खमीर (Yeast) हो। इसके पीछे का तर्क यह है कि जब इजरायली मिस्र से भाग रहे थे, तो उनके पास रोटी के फूलने का समय नहीं था, इसलिए उन्होंने बिना खमीर वाली 'मात्ज़ोह' (Matzoh) खाई थी। भारत में यहूदी परिवार विशेष रूप से मात्ज़ोह तैयार करते हैं या मंगवाते हैं।
2. सेडर (Seder) भोजन:
April 2, 2026 की पूर्व संध्या पर आयोजित 'सेडर' इस त्योहार का सबसे मुख्य आकर्षण है। यह एक अनुष्ठानिक रात्रिभोज है जहाँ परिवार के सदस्य एक साथ बैठते हैं और 'हगादाह' (Haggadah) नामक पुस्तक से निर्गमन की कहानी पढ़ते हैं। सेडर की थाली में छह प्रतीकात्मक खाद्य पदार्थ होते हैं:
- मारोर (Maror): कड़वी जड़ी-बूटियाँ, जो गुलामी की कड़वाहट को दर्शाती हैं।
- चारोसेट (Charoset): फल, मेवे और वाइन का मिश्रण, जो उस गारे की याद दिलाता है जिससे यहूदी मिस्र में ईंटें बनाते थे।
- कारपास (Karpas): एक सब्जी (अक्सर अजवाइन या नमक के पानी में डूबा हुआ आलू), जो वसंत और आंसुओं का प्रतीक है।
- ज़ीरोआ (Zeroah): भुनी हुई हड्डी, जो प्राचीन काल के बलिदान की याद दिलाती है।
- बेइत्ज़ाह (Beitzah): उबला हुआ अंडा, जो जीवन के चक्र और शोक का प्रतीक है।
- चज़ेरेट (Chazeret): दूसरी कड़वी जड़ी-बूटी।
3. प्रार्थना और सिनगॉग:
फसह के पहले दिन सुबह के समय लोग सिनगॉग (यहूदी प्रार्थना स्थल) जाते हैं। मुंबई में केनेसेथ एलियाहू सिनगॉग और मागेन डेविड सिनगॉग जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं। यहाँ समुदाय के लोग मिलकर भजन गाते हैं और ईश्वर का धन्यवाद करते हैं।
भारत में क्षेत्रीय विविधता और समुदाय
यद्यपि पासओवर के मूल सिद्धांत पूरे भारत में समान हैं, लेकिन विभिन्न समुदायों के बीच कुछ सूक्ष्म अंतर देखे जा सकते हैं:
- बेने इजरायल (महाराष्ट्र): यह भारत का सबसे बड़ा यहूदी समुदाय है। वे मुख्य रूप से मुंबई, ठाणे और कोंकण क्षेत्र में रहते हैं। उनके सेडर भोजन में अक्सर भारतीय मसालों का प्रभाव देखा जाता है। वे 'मलेडा' (Malida) समारोह भी आयोजित करते हैं, जिसमें पोहा और फलों का उपयोग किया जाता है, हालांकि यह विशेष रूप से फसह का हिस्सा नहीं है, लेकिन उनकी संस्कृति का अभिन्न अंग है।
- कोचीन यहूदी (केरल): केरल के यहूदी अपनी प्राचीन परंपराओं के लिए जाने जाते हैं। उनके पास फसह के लिए विशेष लोक गीत हैं जो मलयालम और हिब्रू के मिश्रण से बने हैं।
- बगदादी यहूदी: ये मुख्य रूप से मुंबई और कोलकाता में बसे हुए हैं। उनकी परंपराएं मध्य पूर्वी यहूदी रीति-रिवाजों से अधिक प्रेरित हैं।
व्यावहारिक जानकारी और आगंतुकों के लिए सुझाव
यदि आप 2026 में पासओवर के दौरान भारत (विशेषकर महाराष्ट्र) में हैं, तो यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बातें दी गई हैं:
- वस्त्र और शिष्टाचार: यदि आप किसी सिनगॉग में जाने की योजना बना रहे हैं, तो शालीन कपड़े पहनना अनिवार्य है। पुरुषों को अपना सिर ढंकना चाहिए (सिनगॉग में अक्सर टोपी उपलब्ध होती है) और महिलाओं को भी शालीन पोशाक पहननी चाहिए।
- भोजन के नियम: यहूदी मित्रों या परिवारों के घर जाते समय उन्हें खमीर वाला भोजन (जैसे ब्रेड, बिस्कुट, केक) उपहार में न दें। इस समय वे केवल 'कोशर फॉर पासओवर' भोजन ही ग्रहण करते हैं।
- पर्यटन: मुंबई के यहूदी विरासत स्थलों का भ्रमण करने के लिए यह एक अच्छा समय है, लेकिन ध्यान रहे कि त्योहार के पहले और अंतिम दिन सिनगॉग में धार्मिक गतिविधियाँ चरम पर होती हैं, इसलिए प्रवेश के लिए पूर्व अनुमति या आमंत्रण की आवश्यकता हो सकती है।
- मौसम: अप्रैल की शुरुआत में मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में मौसम काफी गर्म हो जाता है। तापमान आमतौर पर 25°C से 35°C के बीच रहता है, इसलिए सूती कपड़े और पर्याप्त पानी साथ रखना उचित है।
क्या यह सार्वजनिक अवकाश है?
भारत में पासओवर की स्थिति अन्य प्रमुख त्योहारों जैसे दिवाली या ईद से थोड़ी अलग है:
- महाराष्ट्र में स्थिति: चूंकि महाराष्ट्र में यहूदी समुदाय की आबादी अधिक है, इसलिए महाराष्ट्र सरकार अक्सर फसह के पहले दिन को एक सार्वजनिक अवकाश के रूप में घोषित करती है। इसका मतलब है कि राज्य सरकार के कार्यालय, स्कूल और कुछ कॉलेज बंद रह सकते हैं।
- शेष भारत: भारत के अन्य राज्यों में यह सार्वजनिक अवकाश नहीं है। बैंक, व्यापारिक संस्थान और निजी कार्यालय सामान्य रूप से कार्य करते हैं। हालांकि, यहूदी कर्मचारियों को अक्सर धार्मिक आधार पर वैकल्पिक अवकाश (Restricted Holiday) लेने की अनुमति होती है।
- परिवहन और सेवाएं: सार्वजनिक परिवहन जैसे ट्रेन, बस और हवाई सेवाएं पूरी तरह से सामान्य रूप से चलती हैं। बाजारों पर भी इसका कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता, सिवाय उन चुनिंदा इलाकों के जहाँ यहूदी आबादी अधिक है।
निष्कर्ष
भारत में फसह या पासओवर का पहला दिन धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक विविधता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता का मूल्य क्या है और कैसे एक छोटा सा समुदाय अपनी परंपराओं को हजारों वर्षों तक एक अलग संस्कृति के बीच भी सुरक्षित रख सकता है। 2026 में, जब आप April 2, 2026 को इस त्योहार के बारे में सोचें, तो याद रखें कि यह केवल एक प्राचीन कहानी का जश्न नहीं है, बल्कि यह मानवीय भावना की विजय और अटूट विश्वास का प्रतीक है। चाहे वह सेडर की थाली हो या सिनगॉग में गूंजती प्रार्थनाएं, पासओवर का हर पहलू शांति, प्रेम और मुक्ति का संदेश देता है।