International Worker's Day

India • May 1, 2026 • Friday

73
Days
09
Hours
11
Mins
22
Secs
until International Worker's Day
Asia/Kolkata timezone

Holiday Details

Holiday Name
International Worker's Day
Country
India
Date
May 1, 2026
Day of Week
Friday
Status
73 days away

About International Worker's Day

Also known as: अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस: भारत में मज़दूरों के संघर्ष और सम्मान का महापर्व

भारत एक ऐसा राष्ट्र है जिसकी नींव यहाँ के करोड़ों श्रमिकों, किसानों और कामगारों के पसीने से सींची गई है। अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, जिसे भारत में 'मई दिवस', 'कामगार दिवस' या 'अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस' के रूप में जाना जाता है, केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत हाथों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है जो देश की प्रगति के पहिये को निरंतर घुमाते रहते हैं। यह दिन उन ऐतिहासिक संघर्षों की याद दिलाता है जिन्होंने काम के घंटों को सीमित करने, न्यूनतम मज़दूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर मानवीय गरिमा को स्थापित करने की नींव रखी।

भारत की विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था में, जहाँ एक ओर अत्याधुनिक आईटी क्षेत्र है, वहीं दूसरी ओर विशाल असंगठित क्षेत्र और कृषि है। अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस इन सभी क्षेत्रों के कामगारों को एक सूत्र में पिरोता है। यह दिन सामाजिक न्याय, समानता और श्रम के सम्मान का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि किसी भी समाज की समृद्धि उसके अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की खुशहाली और उसके अधिकारों की सुरक्षा पर निर्भर करती है। भारत में इस दिन का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहाँ श्रमिक आंदोलनों का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और उसके बाद के राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस विशेष अवसर पर, पूरे भारत में श्रमिक संगठनों द्वारा रैलियाँ निकाली जाती हैं, सभाएँ आयोजित की जाती हैं और मज़दूरों के अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद की जाती है। यह दिन आत्म-चिंतन का भी समय है कि हमने अपने कामगारों के लिए क्या किया है और आने वाले समय में उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता के लिए हमें और क्या कदम उठाने की आवश्यकता है।

2026 में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस कब है?

वर्ष 2026 में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस की महत्वपूर्ण जानकारी निम्नलिखित है:

दिनांक: May 1, 2026 दिन: Friday समय सीमा: इस महत्वपूर्ण दिवस के आगमन में अब केवल 73 दिन शेष हैं।

भारत में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस की तिथि निश्चित है। यह हर साल 1 मई को ही मनाया जाता है। चाहे वह सप्ताह का कोई भी दिन हो, 1 मई की तारीख भारत के श्रमिक इतिहास और वैश्विक श्रमिक एकजुटता के लिए आरक्षित है। अमेरिका और कनाडा जैसे देशों के विपरीत, जहाँ श्रम दिवस सितंबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है, भारत वैश्विक मानकों का पालन करते हुए इसे मई की पहली तारीख को ही मनाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भारत में इसकी शुरुआत

भारत में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस का इतिहास वैश्विक और स्थानीय दोनों ही स्तरों पर बहुत गहरा है। इसकी जड़ें 1886 के शिकागो के 'हेमार्केट मामले' (Haymarket affair) से जुड़ी हैं। उस समय, अमेरिका में मज़दूरों ने काम के घंटों को 15-16 घंटे से घटाकर 8 घंटे करने की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। शिकागो की हेमार्केट स्क्वायर पर हुए एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद मज़दूर नेताओं को दी गई सज़ा ने पूरी दुनिया के श्रमिकों को झकझोर कर रख दिया था। इसी घटना की याद में और मज़दूरों की एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए 1889 में 'द्वितीय इंटरनेशनल' ने 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया।

भारत में इस आंदोलन की शुरुआत मद्रास (अब चेन्नई) से हुई। 1 मई, 1923 को भारत में पहली बार मज़दूर दिवस मनाया गया। इसका नेतृत्व 'लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान' के नेता कॉमरेड सिंगारवेलु चेट्टियार ने किया था। उन्होंने चेन्नई के समुद्र तट (मरीना बीच) पर दो बड़ी सभाएँ आयोजित की थीं। यह भारतीय इतिहास का एक मील का पत्थर था क्योंकि पहली बार भारत में लाल झंडा लहराया गया था और मज़दूरों के अधिकारों के लिए संगठित आवाज़ उठाई गई थी।

सिंगारवेलु चेट्टियार ने उस समय सरकार से मांग की थी कि 1 मई को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए और मज़दूरों को उचित मज़दूरी, बेहतर कार्यदशाएँ और 8 घंटे का कार्यदिवस प्रदान किया जाए। तब से लेकर आज तक, यह दिन भारतीय श्रमिक संघों के लिए अपनी शक्ति और एकता दिखाने का सबसे बड़ा मंच बन गया है।

भारत के विभिन्न राज्यों में इसके नाम

भारत अपनी भाषाई विविधता के लिए जाना जाता है, इसलिए इस दिन को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है: हिंदी: अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस या कामगार दिन मराठी: कामगार दिवस (महाराष्ट्र में यह 'महाराष्ट्र दिवस' के साथ मेल खाता है) तमिल: उझैपालर थिनम (Uzhaipalar Dhinam) कन्नड़: कार्मिकरा दिनाचरणे (Karmikara Dinacharane) तेलुगु: कार्मीका दिनोत्सवम (Karmika Dinotsavam) मलयालम: थोज़िलाली दिनम (Thozhilali Dinam)

उत्सव और गतिविधियाँ

भारत में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाने का तरीका पश्चिमी देशों से थोड़ा भिन्न है। यहाँ यह उत्सव से अधिक एक 'अधिकारों के प्रति जागरूकता' के दिन के रूप में मनाया जाता है।

1. श्रमिक संघों की रैलियाँ और परेड

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों में ट्रेड यूनियनों (जैसे AITUC, INTUC, CITU, BMS) द्वारा विशाल रैलियाँ निकाली जाती हैं। इन रैलियों में मज़दूर अपने हक के नारे लगाते हैं और लाल झंडे लेकर चलते हैं, जो क्रांति और बलिदान का प्रतीक है।

2. राजनेताओं और नेताओं के भाषण

इस दिन देश के प्रधानमंत्री, श्रम मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री श्रमिकों को संबोधित करते हैं। वे सरकार द्वारा श्रमिकों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं (जैसे ई-श्रम पोर्टल, बीमा योजनाएं और पेंशन योजनाएं) की जानकारी देते हैं। विपक्षी दल और श्रमिक नेता अक्सर मौजूदा श्रम कानूनों में सुधार और न्यूनतम वेतन में वृद्धि की माँग करते हैं।

3. सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह

कई कारखानों और सरकारी संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उत्कृष्ट कार्य करने वाले श्रमिकों को 'श्रम रत्न' या अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के सहयोग से निबंध लेखन, भाषण और चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, जिनका विषय अक्सर 'समानता', 'बाल श्रम निषेध' और 'श्रमिक अधिकार' होता है।

4. शैक्षणिक गोष्ठियाँ

विश्वविद्यालयों और थिंक-टैंक्स में श्रम कानूनों, गिग इकोनॉमी (Gig Economy) के उभरते खतरों और डिजिटल युग में श्रमिकों की सुरक्षा जैसे विषयों पर सेमिनार आयोजित किए जाते हैं।

परंपराएं और रीति-रिवाज

यूरोप के विपरीत, जहाँ मई दिवस को 'मेपोल डांस' या वसंत ऋतु के आगमन के उत्सव के रूप में मनाया जाता है, भारत में ऐसी कोई पारंपरिक रीति-रिवाज नहीं हैं। भारत में इसकी प्रकृति पूरी तरह से सामाजिक और राजनीतिक है। यहाँ कोई विशेष पकवान या धार्मिक अनुष्ठान इस दिन से नहीं जुड़ा है। यह पूर्णतः सामाजिक न्याय और श्रम की गरिमा को समर्पित एक धर्मनिरपेक्ष दिन है।

हालाँकि, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों के लिए 1 मई का दोहरा महत्व है। 1 मई, 1960 को ही इन दोनों राज्यों का भाषाई आधार पर गठन हुआ था। इसलिए इन राज्यों में श्रमिक दिवस के साथ-साथ 'महाराष्ट्र दिवस' और 'गुजरात दिवस' की भी धूम रहती है, जहाँ पुलिस परेड और भव्य सांस्कृतिक झाँकियाँ निकाली जाती हैं।

पर्यटकों और प्रवासियों के लिए व्यावहारिक जानकारी

यदि आप 2026 में 1 मई के आसपास भारत की यात्रा कर रहे हैं या यहाँ रह रहे हैं, तो आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. सेवाओं में कमी: जिन राज्यों में इस दिन सार्वजनिक अवकाश होता है, वहाँ सरकारी कार्यालय, बैंक और डाकघर बंद रहते हैं। हालाँकि, आपातकालीन सेवाएँ और अस्पताल खुले रहते हैं।
  2. परिवहन: प्रमुख शहरों में रैलियों और जुलूसों के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से चेन्नई, कोलकाता और मुंबई के मुख्य इलाकों में सड़क मार्ग से यात्रा करने में अधिक समय लग सकता है। सार्वजनिक बसें और मेट्रो चलती हैं, लेकिन भीड़ अधिक हो सकती है।
  3. बाज़ार और दुकानें: निजी क्षेत्र की अधिकांश दुकानें और मॉल खुले रहते हैं, लेकिन कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में बाज़ार बंद रह सकते हैं।
  4. प्रदर्शनों के प्रति सम्मान: भारत में मज़दूर दिवस के प्रदर्शन आमतौर पर शांतिपूर्ण होते हैं। यदि आप किसी रैली के पास हैं, तो शांति बनाए रखें और भीड़-भाड़ वाले इलाकों से बचने की कोशिश करें।
  5. सांस्कृतिक अनुभव: यदि आप भारत के श्रमिक इतिहास को समझना चाहते हैं, तो चेन्नई के मरीना बीच पर स्थित 'श्रमिकों की विजय' (Triumph of Labour) मूर्ति को ज़रूर देखें। यह मूर्ति उन मज़दूरों के कठिन परिश्रम को दर्शाती है जो एक विशाल चट्टान को हटाने का प्रयास कर रहे हैं।

क्या यह सार्वजनिक अवकाश है?

हाँ, भारत में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस एक सार्वजनिक अवकाश है, लेकिन यह राज्य सरकारों के विवेक पर निर्भर करता है। भारत के निम्नलिखित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस दिन आधिकारिक छुट्टी होती है:

तमिलनाडु केरल पश्चिम बंगाल कर्नाटक महाराष्ट्र गुजरात गोवा बिहार झारखंड असम मणिपुर त्रिपुरा

इन राज्यों में स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पूरी तरह बंद रहते हैं। आईटी कंपनियों और अन्य निजी क्षेत्रों में भी कई जगह छुट्टी दी जाती है या कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' की सुविधा दी जाती है। जिन राज्यों में यह आधिकारिक अवकाश नहीं भी है, वहाँ भी ट्रेड यूनियन के सदस्य और कारखानों के मज़दूर अक्सर छुट्टी लेते हैं या आधे दिन का काम करते हैं।

निष्कर्ष

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस भारत के सामाजिक ताने-बाने का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह हमें याद दिलाता है कि एक विकसित भारत का सपना तभी सच हो सकता है जब यहाँ के हर कामगार को सुरक्षा, सम्मान और उचित पारिश्रमिक मिले। 2026 में जब हम इस दिन को मनाएंगे, तो हमारा लक्ष्य न केवल पिछले संघर्षों को याद करना होना चाहिए, बल्कि भविष्य की चुनौतियों जैसे कि स्वचालन (Automation) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में श्रमिकों के हितों की रक्षा करने का संकल्प भी लेना चाहिए।

श्रमिक दिवस भारत के उस अटूट विश्वास का प्रतीक है कि "श्रम ही पूजा है"। चाहे वह खेत में पसीना बहाता किसान हो, गगनचुंबी इमारतें बनाता राजमिस्त्री हो, या दफ्तरों में काम करने वाला कर्मचारी—यह दिन उन सभी के योगदान को नमन करने का दिन है।


महत्वपूर्ण तिथियाँ याद रखें:
अवसर: अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस / 1 मई वर्ष: 2026 दिन: Friday
  • शेष दिन: 73

Frequently Asked Questions

Common questions about International Worker's Day in India

भारत में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस May 1, 2026 को मनाया जाएगा। इस वर्ष यह दिन Friday को पड़ रहा है। आज की तारीख से इस महत्वपूर्ण दिवस के आने में अब केवल 73 दिन शेष बचे हैं। यह दिन दुनिया भर के श्रमिकों के योगदान और उनके अधिकारों के सम्मान में समर्पित है।

हाँ, भारत के कई राज्यों में इस दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है। असम, बिहार, गोवा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मणिपुर, तमिलनाडु, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सरकारी कार्यालय, स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बंद रहते हैं। कई निजी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को इस दिन छुट्टी प्रदान करती हैं, हालांकि यह राज्य सरकार के नियमों और संबंधित कंपनी की नीतियों पर निर्भर करता है।

भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत 1 मई, 1923 को मद्रास (अब चेन्नई) में हुई थी। इसका आयोजन लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा कॉमरेड सिंगारवेलु चेट्टियार के नेतृत्व में किया गया था। उस समय पहली बार लाल झंडे का उपयोग किया गया था और काम के घंटों को आठ घंटे करने, उचित वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग उठाई गई थी। तब से यह दिन भारत के श्रम आंदोलन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है।

भारत की भाषाई विविधता के कारण अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस को अलग-अलग राज्यों में विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। हिंदी भाषी क्षेत्रों में इसे 'अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस' या 'कामगार दिवस' कहा जाता है। महाराष्ट्र में इसे 'कामगार दिवस' के रूप में मनाया जाता है (जो महाराष्ट्र दिवस के साथ भी मेल खाता है), जबकि तमिलनाडु में इसे 'उझैपालर थिनम' के नाम से जाना जाता है। नाम अलग होने के बावजूद, पूरे देश में इसका उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों का सम्मान करना ही है।

श्रमिक दिवस पर भारत में मुख्य रूप से रैलियां और परेड आयोजित की जाती हैं। ट्रेड यूनियनें और श्रमिक संगठन शहरों में विशाल जुलूस निकालते हैं। राजनीतिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता श्रमिकों के अधिकारों, उचित वेतन और सुरक्षा पर भाषण देते हैं। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) जैसे संस्थान भी विभिन्न प्रतियोगिताओं और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। यह दिन उत्सव के बजाय वकालत और एकजुटता प्रदर्शित करने का एक मंच है।

इस दिवस की जड़ें 1886 के शिकागो के 'हेमार्केट मामले' से जुड़ी हैं, जहाँ आठ घंटे के कार्यदिवस की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया था। इसके सम्मान में वैश्विक समाजवादियों ने 1 मई को श्रमिक एकजुटता के दिन के रूप में घोषित किया। भारत में भी इसे राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने और उनके शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने के अवसर के रूप में देखा जाता है।

यदि आप श्रमिक दिवस के दौरान भारत में हैं, तो ध्यान रखें कि जिन राज्यों में अवकाश है, वहां सार्वजनिक सेवाओं में कमी हो सकती है। चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में ट्रेड यूनियनों की रैलियों के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे विरोध प्रदर्शनों वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतें। हालांकि ये प्रदर्शन आमतौर पर शांतिपूर्ण होते हैं, लेकिन भीड़भाड़ से बचने के लिए अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लेना बेहतर है।

भारत में श्रमिक दिवस वैश्विक मानक के अनुसार 1 मई को ही मनाया जाता है, जो अमेरिका और कनाडा (जहाँ यह सितंबर में होता है) से अलग है। भारत में इस दिन कोई धार्मिक अनुष्ठान या पारंपरिक नृत्य (जैसे यूरोप का मेपोल डांस) नहीं होता है। यहाँ यह पूरी तरह से एक सामाजिक और राजनीतिक दिवस है, जो पूरी तरह से श्रम कानूनों में सुधार और सामाजिक न्याय की मांग पर केंद्रित रहता है।

Historical Dates

International Worker's Day dates in India from 2010 to 2025

Year Day of Week Date
2025 Thursday May 1, 2025
2024 Wednesday May 1, 2024
2023 Monday May 1, 2023
2022 Sunday May 1, 2022
2021 Saturday May 1, 2021
2020 Friday May 1, 2020
2019 Wednesday May 1, 2019
2018 Tuesday May 1, 2018
2017 Monday May 1, 2017
2016 Sunday May 1, 2016
2015 Friday May 1, 2015
2014 Thursday May 1, 2014
2013 Wednesday May 1, 2013
2012 Tuesday May 1, 2012
2011 Sunday May 1, 2011
2010 Saturday May 1, 2010

Note: Holiday dates may vary. Some holidays follow lunar calendars or have different observance dates. Purple indicates weekends.