Easter Day

India • April 5, 2026 • Sunday

92
Days
16
Hours
23
Mins
16
Secs
until Easter Day
Asia/Kolkata timezone

Holiday Details

Holiday Name
Easter Day
Country
India
Date
April 5, 2026
Day of Week
Sunday
Status
92 days away
Weekend
Falls on weekend
About this Holiday
Easter Sunday commemorates Jesus Christ’s resurrection, according to Christian belief.

About Easter Day

Also known as: ईस्टर

भारत में ईस्टर: पुनरुत्थान और आशा का महापर्व

ईस्टर, जिसे 'पास्का' (Pascha) के नाम से भी जाना जाता है, ईसाई धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह दिन प्रभु यीशु मसीह के मृत्यु पर विजय प्राप्त करने और उनके पुनरुत्थान की खुशी में मनाया जाता है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहाँ विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का संगम होता है, ईस्टर का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और आध्यात्मिक श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश की, मृत्यु पर जीवन की और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है।

भारत में ईसाई समुदाय की जड़ें बहुत पुरानी हैं, और यहाँ ईस्टर मनाने का तरीका पश्चिमी परंपराओं और स्थानीय भारतीय रीति-रिवाजों का एक अनूठा मिश्रण पेश करता है। ईस्टर का महत्व केवल ईसाइयों के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी के लिए है जो नवीनीकरण और नई शुरुआत में विश्वास रखते हैं। यह दिन 40 दिनों के उपवास, प्रार्थना और तपस्या की अवधि, जिसे 'लेंट' (Lent) कहा जाता है, के समापन का प्रतीक है। लेंट के दौरान, भक्त अपने पापों के लिए पश्चाताप करते हैं और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रयास करते हैं, जिसका चरमोत्कर्ष ईस्टर के आनंदमय उत्सव में होता है।

भारत के विभिन्न राज्यों जैसे केरल, गोवा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में ईस्टर की रौनक देखते ही बनती है। यह त्योहार न केवल चर्च की प्रार्थनाओं तक सीमित है, बल्कि यह परिवारों के मिलन, विशेष व्यंजनों के स्वाद और सामाजिक सद्भाव का भी अवसर है। ईस्टर हमें यह संदेश देता है कि चाहे रात कितनी भी लंबी और अंधेरी क्यों न हो, सुबह की पहली किरण नई आशा और जीवन लेकर अवश्य आती है।

2026 में ईस्टर कब है?

भारत में ईस्टर का पर्व चंद्रमा की स्थिति के आधार पर हर साल अलग-अलग तारीखों पर पड़ता है। वर्ष 2026 के लिए ईस्टर की महत्वपूर्ण जानकारी निम्नलिखित है:

ईस्टर की तिथि: April 5, 2026 दिन: Sunday शेष दिन: ईस्टर आने में अब केवल 92 दिन शेष हैं।

ईस्टर एक 'चल' (Variable) त्योहार है, जिसका अर्थ है कि इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। यह आमतौर पर 21 मार्च के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा के बाद के पहले रविवार को मनाया जाता है। पश्चिमी ईसाई चर्च (कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट) ग्रेगोरियन कैलेंडर का पालन करते हैं, जिसके अनुसार वर्ष 2026 में ईस्टर 5 अप्रैल को मनाया जाएगा।

ईस्टर का धार्मिक महत्व और इतिहास

ईस्टर की कहानी ईसाई धर्म के केंद्र में है। बाइबिल के अनुसार, गुड फ्राइडे के दिन यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया था। उन्होंने मानवता के पापों के लिए अपना बलिदान दिया। उनके निधन के तीसरे दिन, यानी रविवार को, वह अपनी कब्र से जीवित हो उठे। इस घटना को 'पुनरुत्थान' (Resurrection) कहा जाता है।

पवित्र सप्ताह (Holy Week)

ईस्टर से पहले का सप्ताह 'पवित्र सप्ताह' कहलाता है, जो ईसाई कैलेंडर का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है:
  1. पाम संडे (Palm Sunday): यह ईस्टर से एक रविवार पहले मनाया जाता है। यह यीशु के यरूशलेम में विजयी प्रवेश की याद दिलाता है।
  2. मोंडी थर्सडे (Maundy Thursday): यह 2026 में 2 अप्रैल को पड़ेगा। यह दिन यीशु द्वारा अपने शिष्यों के साथ किए गए 'अंतिम भोज' (Last Supper) और उनके द्वारा दी गई विनम्रता की शिक्षा की याद में मनाया जाता है।
  3. गुड फ्राइडे (Good Friday): इस दिन यीशु के बलिदान और क्रूस पर उनकी मृत्यु का स्मरण किया जाता है। वर्ष 2026 में यह 3 अप्रैल को है। भारत में इस दिन चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं होती हैं और शोक मनाया जाता है।
  4. होली सैटरडे (Holy Saturday): यह 4 अप्रैल, 2026 को है। यह चिंतन और प्रतीक्षा का दिन है, जब यीशु कब्र में थे।
ईस्टर रविवार इन सभी घटनाओं का समापन है, जो ईसाई विश्वास की नींव को मजबूत करता है कि यीशु ही ईश्वर के पुत्र हैं और उन्होंने मृत्यु को हरा दिया है।

भारत में ईस्टर मनाने की परंपराएं

भारत में ईस्टर का उत्सव बहुत ही जीवंत होता है। यहाँ की विविधता इसे और भी खास बनाती है।

चर्च की सेवाएं और प्रार्थना

ईस्टर की शुरुआत शनिवार की आधी रात को होने वाली विशेष 'विजिल मास' (Vigil Mass) से होती है। चर्चों को सुंदर फूलों, मोमबत्तियों और रोशनी से सजाया जाता है। कई जगहों पर 'सनराइज सर्विस' (Sunrise Service) का आयोजन किया जाता है, जहाँ लोग सूर्योदय के समय खुले मैदानों या चर्च के प्रांगण में एकत्र होकर यीशु के पुनरुत्थान की घोषणा करते हैं और भजन गाते हैं। प्रार्थनाओं के दौरान विशेष मोमबत्तियाँ जलाई जाती हैं, जो मसीह के प्रकाश का प्रतीक हैं।

ईस्टर अंडे और खरगोश (Easter Eggs and Bunnies)

यद्यपि ईस्टर अंडे की परंपरा पश्चिमी है, लेकिन भारत के शहरी क्षेत्रों और ईसाई बहुल इलाकों में यह बहुत लोकप्रिय हो गई है। अंडे को 'नए जीवन' और 'पुनर्जन्म' का प्रतीक माना जाता है। लोग चॉकलेट के अंडे, प्लास्टिक के अंडे जिनमें उपहार होते हैं, या उबले हुए रंगे हुए अंडे एक-दूसरे को भेंट करते हैं। बच्चों के लिए ईस्टर एग हंट (Easter Egg Hunt) जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। ईस्टर बनी (Rabbit) भी प्रजनन और नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में सजावट का हिस्सा होता है।

पारिवारिक मिलन और दावत

ईस्टर का दिन परिवारों के एक साथ आने का होता है। लेंट के 40 दिनों के परहेज (जैसे मांस या मीठा न खाना) के बाद, ईस्टर पर एक भव्य भोज का आयोजन किया जाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं:
केरल: यहाँ ईस्टर पर 'अप्पम' और 'स्टू' (Appam and Stew) सबसे लोकप्रिय है। साथ ही मांस के विभिन्न व्यंजन और मीठे पकवान जैसे 'वट्टाप्पम' बनाए जाते हैं। गोवा: गोवा में ईस्टर पर 'सोरपोटेल' (Sorpotel) और 'विंडालू' (Vindaloo) जैसे पारंपरिक पुर्तगाली प्रभाव वाले व्यंजन बनाए जाते हैं। यहाँ की बेकरियों में ईस्टर के विशेष केक और कुकीज़ मिलते हैं। पूर्वोत्तर भारत: यहाँ सामुदायिक भोज का आयोजन किया जाता है जहाँ स्थानीय जनजातीय व्यंजनों का आनंद लिया जाता है।

उपहारों का आदान-प्रदान

लोग अपने मित्रों और रिश्तेदारों को ईस्टर की शुभकामनाओं के साथ उपहार, कार्ड और मिठाइयाँ देते हैं। यह आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ाने का एक तरीका है।

भारत के प्रमुख क्षेत्रों में ईस्टर का उत्सव

भारत के कुछ हिस्सों में ईस्टर की विशेष रौनक देखी जा सकती है:

तमिलनाडु (चेन्नई, कन्याकुमारी, तूतुकुड़ी)

तमिलनाडु में ईस्टर बहुत ही पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। चेन्नई की ऐतिहासिक चर्चों जैसे 'सैंथोम बेसिलिका' में हजारों की संख्या में भक्त उमड़ते हैं। कन्याकुमारी और तूतुकुड़ी जैसे तटीय जिलों में ईस्टर के जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें यीशु के जीवन की झांकियां दिखाई जाती हैं। लोग नए कपड़े पहनते हैं और चर्च की सेवाओं के बाद गरीबों को दान देते हैं।

गोवा

गोवा अपनी समृद्ध ईसाई विरासत के लिए जाना जाता है। यहाँ ईस्टर एक सार्वजनिक उत्सव जैसा होता है। पणजी और मडगाँव की सड़कों पर लोग ईस्टर की बधाई देते हुए देखे जा सकते हैं। चर्चों में आधी रात की प्रार्थना में स्थानीय कोंकणी भाषा और अंग्रेजी में भजन गाए जाते हैं। गोवा के समुद्र तटों पर भी पर्यटकों के लिए विशेष ईस्टर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

केरल

केरल में सीरियन ईसाई समुदाय ईस्टर को बहुत ही श्रद्धापूर्वक मनाता है। यहाँ इसे 'उयिर्प्पु परुन्नाल' (Uyirppu Perunnal) कहा जाता है। केरल के घरों में ईस्टर की सुबह पारंपरिक नाश्ते के साथ शुरू होती है और चर्च में पवित्र भोज (Holy Communion) में भाग लेना अनिवार्य माना जाता है।

उत्तर-पूर्व भारत (मिजोरम, नागालैंड, मेघालय)

इन राज्यों में ईसाई धर्म को मानने वालों की संख्या अधिक है, इसलिए यहाँ ईस्टर एक प्रमुख सामाजिक त्योहार है। चर्चों में दिन भर भजन और संगीत के कार्यक्रम चलते हैं। युवा समूहों द्वारा नाटकों का मंचन किया जाता है जो ईस्टर के संदेश को प्रसारित करते हैं।

रूढ़िवादी ईस्टर (Orthodox Easter) के बारे में महत्वपूर्ण नोट

भारत में कुछ ईसाई समुदाय, जैसे कि मलंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च और अन्य पूर्वी रूढ़िवादी (Orthodox) समुदाय, ईस्टर की गणना के लिए जूलियन कैलेंडर का उपयोग करते हैं। इस कारण से, उनका ईस्टर अक्सर पश्चिमी चर्चों से अलग होता है।

वर्ष 2026 में, ऑर्थोडॉक्स ईस्टर 12 अप्रैल, 2026 को मनाया जाएगा। यह पश्चिमी ईस्टर (5 अप्रैल) के ठीक एक सप्ताह बाद आता है। यदि आप केरल या अन्य क्षेत्रों में ऑर्थोडॉक्स समुदायों के साथ जुड़े हैं, तो इस तिथि का ध्यान रखना आवश्यक है। यह अंतर कैलेंडर की गणना और वसंत विषुव (Vernal Equinox) के निर्धारण के कारण होता है।

क्या ईस्टर पर सार्वजनिक अवकाश होता है?

भारत में ईस्टर की छुट्टियों के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें:

  1. प्रतिबंधित अवकाश (Restricted Holiday): भारत सरकार के कैलेंडर में ईस्टर रविवार को एक 'प्रतिबंधित अवकाश' (RH) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसका मतलब है कि सरकारी कर्मचारी अपनी पसंद के आधार पर इस दिन छुट्टी ले सकते हैं।
  2. रविवार का दिन: चूंकि ईस्टर हमेशा रविवार को पड़ता है, इसलिए अधिकांश कार्यालय, बैंक और शैक्षणिक संस्थान पहले से ही साप्ताहिक अवकाश के कारण बंद रहते हैं।
  3. व्यावसायिक प्रतिष्ठान: अधिकांश निजी कंपनियाँ, मॉल, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान ईस्टर के दिन खुले रहते हैं, हालांकि कुछ ईसाई स्वामित्व वाले व्यवसाय बंद रह सकते हैं।
  4. राज्य स्तर पर भिन्नता: नागालैंड, मिजोरम और मेघालय जैसे राज्यों में, जहाँ ईसाई जनसंख्या अधिक है, ईस्टर को एक बड़े सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है।

ईस्टर और सामाजिक सेवा

ईस्टर का एक महत्वपूर्ण पहलू दान और सेवा है। भारत में कई चर्च और ईसाई संगठन इस दिन अनाथालयों, वृद्धाश्रमों और अस्पतालों में भोजन और कपड़े वितरित करते हैं। ईस्टर का 'नवीनीकरण' का संदेश लोगों को दूसरों की मदद करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है। कई लोग इस दिन नए व्यापारिक उद्यम शुरू करना या महत्वपूर्ण पारिवारिक निर्णय लेना शुभ मानते हैं।

निष्कर्ष

ईस्टर केवल अंडों और चॉकलेट का त्योहार नहीं है, बल्कि यह मानव आत्मा के उत्थान और बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है। भारत की धरती पर, जहाँ विभिन्न संस्कृतियाँ एक साथ फलती-फूलती हैं, ईस्टर का पर्व शांति, प्रेम और क्षमा का संदेश फैलाता है। चाहे वह चर्च की शांत प्रार्थना हो, परिवार के साथ स्वादिष्ट भोजन हो, या बच्चों द्वारा ईस्टर अंडों की खोज—हर गतिविधि में एक नई उमंग और आशा छिपी होती है।

जैसा कि हम 2026 में ईस्टर की प्रतीक्षा कर रहे हैं, यह समय हमें अपने जीवन पर विचार करने, अपनों के साथ खुशियाँ बांटने और एक बेहतर भविष्य की कामना करने का अवसर देता है। ईस्टर का यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में सुख, शांति और नई ऊर्जा लेकर आए।

सभी को ईस्टर की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Frequently Asked Questions

Common questions about Easter Day in India

भारत में ईस्टर का त्यौहार April 5, 2026 को मनाया जाएगा, जो कि Sunday का दिन है। वर्तमान तिथि से इस विशेष दिन के आने में 92 दिन शेष हैं। ईस्टर का निर्धारण चंद्र कैलेंडर के आधार पर किया जाता है, इसलिए यह हर साल अलग-अलग तारीखों पर आता है, लेकिन यह हमेशा रविवार को ही मनाया जाता है।

नहीं, ईस्टर भारत में पूर्ण सार्वजनिक अवकाश नहीं है, बल्कि इसे एक 'प्रतिबंधित अवकाश' (Restricted Holiday) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसका मतलब है कि अधिकांश सरकारी कार्यालय, बैंक और शैक्षणिक संस्थान बंद रह सकते हैं, लेकिन निजी व्यावसायिक प्रतिष्ठान और दुकानें आमतौर पर खुली रहती हैं। कर्मचारी अपनी इच्छा और पात्रता के अनुसार इस दिन छुट्टी लेने का विकल्प चुन सकते हैं।

ईस्टर ईसाई धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो ईसा मसीह के पुनरुत्थान की स्मृति में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूली पर चढ़ाए जाने के तीसरे दिन ईसा मसीह फिर से जीवित हो गए थे। यह दिन मृत्यु पर जीवन की विजय और शाश्वत जीवन की आशा का प्रतीक है। यह 'लेंट' (Lent) के 40 दिनों के उपवास और तपस्या की अवधि के समापन का भी प्रतीक है।

भारत में ईस्टर मुख्य रूप से ईसाई समुदायों द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्सव की शुरुआत चर्चों में मध्यरात्रि की प्रार्थना सभाओं और विशेष भजनों के साथ होती है। चर्चों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं और विशेष प्रार्थना सेवाओं में भाग लेते हैं। इसके बाद परिवार एक साथ मिलकर पारंपरिक भोजन और मिठाइयाँ साझा करते हैं। तमिलनाडु, केरल और गोवा जैसे राज्यों में इसकी रौनक विशेष रूप से देखने को मिलती है।

ईस्टर की सबसे लोकप्रिय परंपराओं में 'ईस्टर एग्स' (Easter Eggs) का आदान-प्रदान शामिल है, जो नए जीवन और पुनर्जन्म का प्रतीक माने जाते हैं। बच्चे अक्सर इन अंडों को सजाने और खोजने के खेल का आनंद लेते हैं। इसके अलावा, कई समुदायों में धार्मिक जुलूस निकाले जाते हैं। यह समय नए उद्यम शुरू करने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए भी शुभ माना जाता है, क्योंकि यह नवीनीकरण और आशा का संदेश देता है।

ईस्टर 'पवित्र सप्ताह' का समापन बिंदु है, जो ईसा मसीह के अंतिम दिनों की याद दिलाता है। इसकी शुरुआत 'मोंडी थर्सडे' (Maundy Thursday) से होती है, जिसके बाद 'गुड फ्राइडे' आता है जब ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। शनिवार को 'होली सैटरडे' के रूप में चिंतन के दिन के रूप में मनाया जाता है, और अंत में रविवार को ईस्टर के साथ खुशी मनाई जाती है। यह पूरा सप्ताह ईसाई धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारत में कुछ ऑर्थोडॉक्स ईसाई समुदाय (जैसे ग्रीक या कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स) ईस्टर को एक अलग तारीख पर मना सकते हैं। 2026 में, ऑर्थोडॉक्स ईस्टर 12 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह अंतर इसलिए है क्योंकि ऑर्थोडॉक्स चर्च गणना के लिए जूलियन कैलेंडर का उपयोग करते हैं, जबकि कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट चर्च ग्रेगोरियन कैलेंडर का पालन करते हैं, जिसके कारण त्योहार की तारीखों में एक सप्ताह या उससे अधिक का अंतर हो सकता है।

यदि आप ईस्टर के दौरान भारत की यात्रा कर रहे हैं, तो आपको विशेष रूप से चेन्नई, कन्याकुमारी, गोवा और कोच्चि जैसे क्षेत्रों का दौरा करना चाहिए। पर्यटक चर्चों में होने वाली भव्य सजावट और विशेष संगीत कार्यक्रमों का अनुभव कर सकते हैं। कई होटलों और बेकरियों में विशेष ईस्टर ब्रंच और पारंपरिक मिठाइयाँ जैसे 'हॉट क्रॉस बन्स' उपलब्ध होते हैं। स्थानीय समुदायों के साथ प्रार्थना सभाओं में शामिल होना भारत की सांस्कृतिक विविधता को समझने का एक शानदार अवसर प्रदान करता है।

Historical Dates

Easter Day dates in India from 2010 to 2025

Year Day of Week Date
2025 Sunday April 20, 2025
2024 Sunday March 31, 2024
2023 Sunday April 9, 2023
2022 Sunday April 17, 2022
2021 Sunday April 4, 2021
2020 Sunday April 12, 2020
2019 Sunday April 21, 2019
2018 Sunday April 1, 2018
2017 Sunday April 16, 2017
2016 Sunday March 27, 2016
2015 Sunday April 5, 2015
2014 Sunday April 20, 2014
2013 Sunday March 31, 2013
2012 Sunday April 8, 2012
2011 Sunday April 24, 2011
2010 Sunday April 4, 2010

Note: Holiday dates may vary. Some holidays follow lunar calendars or have different observance dates. Purple indicates weekends.