Pongal

India • January 14, 2026 • Wednesday

11
Days
16
Hours
24
Mins
15
Secs
until Pongal
Asia/Kolkata timezone

Holiday Details

Holiday Name
Pongal
Country
India
Date
January 14, 2026
Day of Week
Wednesday
Status
11 days away
About this Holiday
Many southern states in India, particularly Tamil Nadu, celebrate Pongal as a thanksgiving for the good harvest season in mid-January every year.

About Pongal

Also known as: पोंगल

पोंगल: भारत का समृद्ध फसल उत्सव और सांस्कृतिक गौरव

तमिलनाडु की जीवंत संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक 'पोंगल' केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महापर्व है। यह दक्षिण भारत, विशेष रूप से तमिलनाडु के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण उत्सवों में से एक है। 'पोंगल' शब्द का तमिल भाषा में शाब्दिक अर्थ होता है "उबलना" या "छलकना"। यह शब्द उस पारंपरिक अनुष्ठान से आया है जिसमें नए कटे हुए चावलों को दूध और गुड़ के साथ मिट्टी के बर्तन में तब तक उबाला जाता है जब तक कि वह बर्तन से बाहर न गिरने लगे। यह 'छलकना' समृद्धि, प्रचुरता और आने वाले वर्ष के लिए खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

यह त्योहार मुख्य रूप से किसानों का त्योहार है, जो अपनी मेहनत की फसल कटने के बाद भगवान सूर्य और प्रकृति को धन्यवाद देने के लिए मनाया जाता है। जब मानसून की बारिश के बाद खेत धान, गन्ने और हल्दी की फसलों से लहलहा उठते हैं, तब किसान अपनी खुशी को इस उत्सव के माध्यम से प्रकट करते हैं। पोंगल का महत्व केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार की एकता, नए संकल्पों और पुराने गिले-शिकवों को भुलाकर एक नई शुरुआत करने का भी समय है। तमिल कैलेंडर के अनुसार, यह 'थाई' महीने की शुरुआत में मनाया जाता है, जिसके बारे में एक प्रसिद्ध कहावत है - "थाई पिरंधाल वज़ी पिरक्कुम", जिसका अर्थ है कि थाई महीने की शुरुआत के साथ ही जीवन में नई राहें और अवसर खुलेंगे।

पोंगल का आध्यात्मिक और खगोलीय महत्व भी अत्यधिक है। यह उस समय को चिह्नित करता है जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है और अपनी उत्तर दिशा की यात्रा (उत्तरायण) शुरू करता है। यह सर्दियों के अंत और वसंत के आगमन का संकेत है। भारत के अन्य हिस्सों में इसे मकर संक्रांति, लोहड़ी या बिहू के रूप में मनाया जाता है, लेकिन तमिलनाडु में इसकी चार दिवसीय संरचना और पशुओं के प्रति विशेष सम्मान इसे विश्व भर में अद्वितीय बनाता है।

2026 में पोंगल कब है?

वर्ष 2026 में पोंगल का उत्सव अत्यंत उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस उत्सव की मुख्य तिथियां और विवरण निम्नलिखित हैं:

मुख्य पोंगल (थाई पोंगल) की तिथि: January 14, 2026 सप्ताह का दिन: Wednesday उत्सव की अवधि: 14 जनवरी से 17 जनवरी, 2026 तक समय गणना: आज से इस महापर्व के शुरू होने में केवल 11 दिन शेष हैं।

पोंगल की तिथि हिंदू चंद्र कैलेंडर और सौर चक्र के आधार पर निर्धारित की जाती है। हालांकि ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह आमतौर पर 14 या 15 जनवरी को पड़ता है, लेकिन खगोलीय गणनाओं के कारण इसमें कभी-कभी एक दिन का अंतर आ सकता है। 2026 में, संक्रांति का क्षण 14 जनवरी को दोपहर 03:13 बजे होगा, जिससे 15 जनवरी को मुख्य 'थाई पोंगल' का आयोजन होगा। यह एक परिवर्तनशील तिथि वाला त्योहार है जो सौर चक्र का अनुसरण करता है।

ऐतिहासिक उत्पत्ति और पौराणिक कथाएँ

पोंगल के इतिहास की जड़ें बहुत गहरी हैं। शिलालेखों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, इस त्योहार को मनाने की परंपरा चोल राजवंश (1070-1122 ईस्वी) के समय से चली आ रही है। उस समय इसे 'पुथुयेदु' के नाम से जाना जाता था और इसे फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता था। प्राचीन तमिल साहित्य 'संगम' में भी इस उत्सव के समान 'थाई नीरादल' का उल्लेख मिलता है, जहाँ युवा युवतियाँ देश की समृद्धि के लिए व्रत रखती थीं।

इस त्योहार से जुड़ी कई लोकप्रिय पौराणिक कथाएँ भी हैं। एक प्रसिद्ध कथा भगवान शिव और उनके बैल 'नंदी' से संबंधित है। कहा जाता है कि शिव ने नंदी को पृथ्वी पर जाकर मनुष्यों को संदेश देने के लिए कहा था कि वे प्रतिदिन तेल से स्नान करें और महीने में केवल एक बार भोजन करें। लेकिन नंदी ने गलती से संदेश उल्टा दे दिया कि वे प्रतिदिन भोजन करें और महीने में एक बार तेल स्नान करें। इस गलती से क्रोधित होकर शिव ने नंदी को पृथ्वी पर ही रहने और किसानों की खेती में मदद करने का श्राप दिया। यही कारण है कि पोंगल के दौरान बैलों और गायों की विशेष पूजा की जाती है।

एक अन्य कथा भगवान इंद्र और भगवान कृष्ण से जुड़ी है। माना जाता है कि कृष्ण ने इंद्र के अहंकार को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। इसके बाद इंद्र को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने क्षमा माँगी। पोंगल का पहला दिन 'भोगी' भगवान इंद्र को समर्पित है, जो बारिश के देवता हैं, ताकि वे अगली फसल के लिए अच्छी वर्षा प्रदान करें।

चार दिनों का विस्तृत उत्सव

पोंगल एक चार दिवसीय विस्तृत उत्सव है, जहाँ प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व और अनुष्ठान होता है:

1. भोगी पोंगल (14 जनवरी, 2026)

यह उत्सव का पहला दिन है और यह नवीनीकरण का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और पुरानी, बेकार हो चुकी वस्तुओं को त्याग देते हैं। सुबह-सुबह घर के बाहर कूड़े और पुरानी चीजों की होली जलाई जाती है, जिसे 'भोगी मंतलु' कहा जाता है। यह बुराई और पुरानी आदतों को त्यागकर नई ऊर्जा के स्वागत का प्रतीक है। इस दिन भगवान इंद्र की पूजा की जाती है। घरों को ताजे फूलों और आम के पत्तों (तोरण) से सजाया जाता है।

2. थाई पोंगल (15 जनवरी, 2026)

यह पोंगल का सबसे मुख्य दिन है। इस दिन सूर्य देव (सूर्य भगवन) की पूजा की जाती है। लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और नए कपड़े पहनते हैं। घर के आंगन में सुंदर 'कोलम' (चावल के आटे से बनी रंगोली) बनाई जाती है। मुख्य अनुष्ठान में एक नए मिट्टी के बर्तन को हल्दी के पौधों और फूलों से सजाया जाता है। इसमें ताजे कटे हुए चावल, दूध और गुड़ डालकर खुले आसमान के नीचे पकाया जाता है। जैसे ही दूध उबलकर बर्तन से बाहर गिरता है, परिवार के सभी सदस्य खुशी से "पोंगालो पोंगल!" चिल्लाते हैं। यह उबाल समृद्धि का प्रतीक है। इस पके हुए मीठे चावल (शक्कर पोंगल) को पहले सूर्य देव को अर्पित किया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। गन्ने के टुकड़े इस दिन के भोजन का अनिवार्य हिस्सा होते हैं।

3. मट्टू पोंगल (16 जनवरी, 2026)

तीसरा दिन कृषि में सहायक पशुओं, विशेष रूप से गायों और बैलों को समर्पित है। हिंदुओं के लिए गाय एक पवित्र माता के समान है, और बैल किसान का सबसे बड़ा साथी है। इस दिन मवेशियों को नहलाया जाता है, उनके सींगों को चमकीले रंगों से रंगा जाता है और उनके गले में फूलों की माला और घंटियाँ बाँधी जाती हैं। उन्हें विशेष रूप से तैयार पोंगल, गुड़ और फल खिलाए जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में इस दिन 'जल्लीकट्टू' (बैल वश में करने का खेल) का आयोजन होता है, जो साहस और शौर्य का प्रतीक माना जाता है। हालांकि यह विवादों में भी रहा है, लेकिन यह तमिल संस्कृति का एक अभिन्न अंग बना हुआ है।

4. कानम पोंगल (17 जनवरी, 2026)

उत्सव का अंतिम दिन मेल-मिलाप और मनोरंजन का होता है। 'कानम' का अर्थ है 'देखना' या 'भेंट करना'। इस दिन लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के घर जाते हैं। बड़े बुजुर्ग छोटों को आशीर्वाद और उपहार देते हैं। महिलाएं अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना करती हैं और कौओं को भोजन (बचे हुए पोंगल के गोले) खिलाती हैं। इस दिन समुद्र तटों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर भारी भीड़ देखी जा सकती है क्योंकि लोग पिकनिक और सैर-सपाटे के लिए बाहर निकलते हैं।

पारंपरिक व्यंजन: स्वाद और स्वास्थ्य का संगम

पोंगल के दौरान भोजन का विशेष महत्व होता है। यह उत्सव बिना पारंपरिक व्यंजनों के अधूरा है:

  1. वेन पोंगल (Ven Pongal): यह चावल और मूंग की दाल से बना एक नमकीन व्यंजन है, जिसमें घी, काली मिर्च, जीरा, अदरक और काजू का तड़का लगाया जाता है। यह न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि पचाने में भी बहुत हल्का होता है।
  2. शक्कर पोंगल (Sakkarai Pongal): यह गुड़, चावल, दाल और दूध से बना मीठा व्यंजन है। इसमें इलायची और सूखे मेवों की खुशबू इसे बेहद खास बनाती है।
  3. अवियल और सांभर: पोंगल के साथ विभिन्न प्रकार की ताजी सब्जियों से बना सांभर और नारियल आधारित अवियल परोसा जाता है।
  4. गन्ना: गन्ने के बिना पोंगल अधूरा है। यह मिठास और खुशहाली का प्रतीक है। बाजारों में गन्ने के बड़े-बड़े गट्ठर बिकते हुए देखे जा सकते हैं।

पर्यटकों और आगंतुकों के लिए व्यावहारिक जानकारी

यदि आप पोंगल के दौरान तमिलनाडु की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो यहाँ कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:

कहाँ जाएँ: चेन्नई में उत्सव का आधुनिक रूप देखने को मिलता है, लेकिन वास्तविक सांस्कृतिक अनुभव के लिए मदुरै, तंजावुर या कोयंबटूर जैसे शहरों और उनके आसपास के गांवों का दौरा करें। मदुरै में 'जल्लीकट्टू' देखना एक रोमांचक अनुभव हो सकता है। वेशभूषा: मंदिरों और पारंपरिक आयोजनों में शामिल होने के लिए शालीन कपड़े पहनें। पुरुषों के लिए 'धोती' (वेष्टी) और महिलाओं के लिए 'साड़ी' पहनना सबसे उपयुक्त है। भोजन: स्थानीय घरों या पारंपरिक भोजनालयों में 'केले के पत्ते' पर परोसे जाने वाले भोजन का आनंद लें। यह न केवल स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि एक अनूठा अनुभव भी है। फोटोग्राफी: पोंगल के दौरान 'कोलम' और सामूहिक खाना पकाने के दृश्य बहुत सुंदर होते हैं। हालांकि, लोगों की निजी प्रार्थनाओं के दौरान फोटो खींचने से पहले अनुमति जरूर लें। मौसम: जनवरी में तमिलनाडु का मौसम बहुत सुहावना होता है। तापमान आमतौर पर 20°C से 30°C के बीच रहता है, जो यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त समय है।

पोंगल का वैश्विक स्वरूप

आज पोंगल केवल भारत तक सीमित नहीं है। श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में रहने वाले तमिल प्रवासी इस त्योहार को उसी उत्साह के साथ मनाते हैं। सिंगापुर के लिटिल इंडिया क्षेत्र में पोंगल के दौरान भव्य सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह त्योहार दुनिया भर में तमिल पहचान और संस्कृति को जोड़ने का एक माध्यम बन गया है।

क्या पोंगल पर सार्वजनिक अवकाश होता है?

हाँ, पोंगल तमिलनाडु और पुडुचेरी में एक प्रमुख सार्वजनिक अवकाश है।

बैंक और सरकारी कार्यालय: थाई पोंगल (15 जनवरी) के दिन सभी सरकारी कार्यालय, स्कूल, कॉलेज और बैंक बंद रहते हैं। कई निजी कंपनियां भी इस दौरान 2 से 4 दिनों की छुट्टी देती हैं। बाजार: त्योहार से कुछ दिन पहले बाजार बहुत व्यस्त रहते हैं। हालांकि मुख्य पोंगल के दिन कुछ छोटी दुकानें बंद हो सकती हैं, लेकिन प्रमुख बाजार और पर्यटन स्थल खुले रहते हैं। परिवहन: पोंगल के दौरान लोग अपने पैतृक गांवों की यात्रा करते हैं, इसलिए बसों और ट्रेनों में भारी भीड़ होती है। यदि आप यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो टिकट बुक करना और परिवहन की व्यवस्था पहले से करना अनिवार्य है।

पोंगल एक ऐसा त्योहार है जो हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। यह हमें सिखाता है कि प्रकृति हमारे जीवन का आधार है और उसके प्रति सम्मान व्यक्त करना हमारा कर्तव्य है। 2026 में पोंगल का यह उत्सव सभी के जीवन में नई मिठास और खुशियाँ लेकर आए, यही इस पावन पर्व की सच्ची भावना है।

पोंगालो पोंगल!

Frequently Asked Questions

Common questions about Pongal in India

वर्ष 2026 में पोंगल का उत्सव January 14, 2026 को शुरू होगा, जो कि Wednesday का दिन है। आज से इस पावन पर्व के शुरू होने में केवल 11 दिन शेष हैं। मुख्य उत्सव चार दिनों तक चलता है, जिसमें थाई पोंगल 15 जनवरी को मनाया जाएगा। यह त्योहार तमिल महीने 'थाई' की शुरुआत और सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है।

हाँ, पोंगल विशेष रूप से तमिलनाडु में एक प्रमुख सार्वजनिक अवकाश है। इस दौरान सरकारी कार्यालय, स्कूल, बैंक और अधिकांश व्यावसायिक संस्थान बंद रहते हैं। थाई पोंगल के दिन पूरे राज्य में आधिकारिक छुट्टी होती है। हालांकि बाजार और मंदिर खुले रहते हैं और वहां काफी रौनक देखने को मिलती है। यह समय परिवारों के एक साथ आने और सामुदायिक मेल-मिलाप का होता है।

पोंगल एक प्राचीन हिंदू फसल उत्सव है जिसका इतिहास चोल काल (1070-1122 ईस्वी) से जुड़ा है। 'पोंगल' शब्द का अर्थ है 'उबालना' या 'छलकना', जो समृद्धि और प्रचुरता का प्रतीक है। यह त्योहार प्रकृति, सूर्य देव और वर्षा के देवता इंद्र के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। यह सर्दियों के अंत और नई शुरुआत का संकेत देता है, जिसके बारे में तमिल में कहा जाता है कि 'थाई का महीना नए रास्ते खोलता है'।

यह उत्सव चार दिनों में विभाजित है: पहले दिन 'भोगी' पर पुरानी वस्तुओं को जलाकर सफाई की जाती है। दूसरे दिन 'थाई पोंगल' पर मिट्टी के बर्तनों में नए चावल और गुड़ का पोंगल बनाया जाता है और सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। तीसरे दिन 'मट्टू पोंगल' पर मवेशियों की पूजा की जाती है और उन्हें सजाया जाता है। अंतिम दिन 'कानुम पोंगल' पर परिवार एक साथ पिकनिक मनाते हैं और रिश्तेदारों से मिलते हैं।

मट्टू पोंगल का दिन विशेष रूप से उन गायों और बैलों को समर्पित है जो खेती में किसानों की सहायता करते हैं। इस दिन मवेशियों को नहलाया जाता है, उनके सींगों को रंगा जाता है और उन्हें फूलों की माला पहनाई जाती है। उन्हें विशेष रूप से तैयार किया गया पोंगल, गुड़ और फल खिलाए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस दिन सांडों को वश में करने वाला खेल 'जल्लीकट्टू' भी आयोजित किया जाता है, जो साहस का प्रतीक माना जाता है।

पोंगल के दौरान मुख्य व्यंजन 'शक्कराई पोंगल' (मीठा चावल) और 'वेन पोंगल' (नमकीन चावल और दाल) हैं। इन्हें नए कटे हुए चावल, मूंग दाल, घी और काजू के साथ बनाया जाता है। इसके अलावा गन्ने का सेवन बहुत लोकप्रिय है। मंदिरों और घरों में 'पायसम' भी बनाया जाता है। पारंपरिक रूप से पोंगल को खुले में मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है जब तक कि वह उबलकर बाहर न गिरने लगे, जिसे शुभ माना जाता है।

यदि आप पोंगल के दौरान तमिलनाडु की यात्रा कर रहे हैं, तो मदुरै या चेन्नई जैसे शहरों में जाना सबसे अच्छा है। मंदिरों में जाते समय पारंपरिक पोशाक जैसे साड़ी या धोती पहनना उचित है। आप सार्वजनिक पोंगल पकाने के कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं। शाकाहारी भोजन का आनंद लें और भोजन की बर्बादी न करें। इस दौरान मौसम सुहावना (20-30°C) रहता है, जो घूमने के लिए बहुत अनुकूल है।

हालांकि पोंगल और मकर संक्रांति दोनों सूर्य के राशि परिवर्तन का उत्सव मनाते हैं, लेकिन पोंगल विशेष रूप से तमिल संस्कृति और परंपराओं में गहराई से रचा-बसा है। जहां भारत के अन्य हिस्सों में संक्रांति एक या दो दिन मनाई जाती है, वहीं पोंगल चार दिनों का विस्तृत उत्सव है जिसमें मवेशियों की पूजा और भोगी जैसे विशिष्ट रिवाज शामिल हैं। यह न केवल एक धार्मिक पर्व है बल्कि तमिल पहचान और कृषि जीवन का उत्सव भी है।

Historical Dates

Pongal dates in India from 2010 to 2025

Year Day of Week Date
2025 Tuesday January 14, 2025
2024 Monday January 15, 2024
2023 Sunday January 15, 2023
2022 Friday January 14, 2022
2021 Thursday January 14, 2021
2020 Wednesday January 15, 2020
2019 Tuesday January 15, 2019
2018 Sunday January 14, 2018
2017 Saturday January 14, 2017
2016 Friday January 15, 2016
2015 Thursday January 15, 2015
2014 Tuesday January 14, 2014
2013 Monday January 14, 2013
2012 Sunday January 15, 2012
2011 Saturday January 15, 2011
2010 Thursday January 14, 2010

Note: Holiday dates may vary. Some holidays follow lunar calendars or have different observance dates. Purple indicates weekends.