Happy Hazarat Ali's Birthday!

Today is Hazarat Ali's Birthday in India!

TODAY!
Enjoy Hazarat Ali's Birthday!

Holiday Details

Holiday Name
Hazarat Ali's Birthday
Country
India
Date
January 3, 2026
Day of Week
Saturday
Status
Today!
Weekend
Falls on weekend
About this Holiday
Hazarat Ali's Birthday is a restricted holiday in India

About Hazarat Ali's Birthday

Also known as: हज़रत अली का जन्मदिन

हज़रत अली का जन्मदिन: भारत में आस्था, न्याय और वीरता का उत्सव

हज़रत अली का जन्मदिन, जिसे 'जश्न-ए-विलादत' या 'यौम-ए-अली' के नाम से भी जाना जाता है, भारत और दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लिए एक अत्यंत पवित्र और हर्षोल्लास का अवसर है। यह दिन इस्लाम के इतिहास की सबसे महान विभूतियों में से एक, इमाम अली इब्न अबू तालिब की जयंती का प्रतीक है। इमाम अली न केवल पैगंबर मोहम्मद साहब के चचेरे भाई और दामाद थे, बल्कि वे ज्ञान, साहस, न्याय और आध्यात्मिकता के एक ऐसे स्तंभ थे, जिनका प्रभाव आज भी करोड़ों लोगों के जीवन पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। भारत की गंगा-जमुनी तहजीब में हज़रत अली के व्यक्तित्व को एक ऐसे आदर्श के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने मानवता और सत्य की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

हज़रत अली का जन्म मक्का की पवित्र काबा के भीतर हुआ था, जो अपने आप में एक अद्वितीय और चमत्कारी घटना मानी जाती है। इस्लामी परंपरा के अनुसार, वे इतिहास के एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिनका जन्म इस्लाम के इस सबसे पवित्र स्थल के भीतर हुआ। उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था; वे एक महान योद्धा थे जिन्होंने इस्लाम की प्रारंभिक लड़ाइयों में अदम्य साहस का परिचय दिया, वे एक प्रकांड विद्वान थे जिनकी सूक्तियां और उपदेश आज भी 'नहजुल बलागा' जैसी पुस्तकों के माध्यम से मार्गदर्शन करते हैं, और वे एक न्यायप्रिय शासक थे जिन्होंने सत्ता को हमेशा जनसेवा का माध्यम माना। भारत में, जहाँ सूफीवाद और भक्ति परंपरा की जड़ें गहरी हैं, हज़रत अली को 'मौला अली' और 'शाह-ए-मर्दां' (पुरुषों के राजा) के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है।

यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आत्म-चिंतन और नैतिकता के मार्ग पर चलने के संकल्प का दिन भी है। भारत के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले मुस्लिम, विशेष रूप से शिया समुदाय, इस दिन को बड़े पैमाने पर मनाते हैं, लेकिन सुन्नी समुदाय के बीच भी उनके प्रति अगाध श्रद्धा है। इस दिन की महत्ता इस बात में निहित है कि यह हमें याद दिलाता है कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होना और सत्य का साथ देना ही धर्म का वास्तविक सार है।

2026 में हज़रत अली का जन्मदिन कब है?

भारत में हज़रत अली का जन्मदिन इस्लामी चंद्र कैलेंडर के सातवें महीने, रज्जब की 13 तारीख को मनाया जाता है। चूंकि इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होता है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार इसकी तिथि हर साल बदलती रहती है।

वर्ष 2026 के लिए, इस पावन पर्व की जानकारी निम्नलिखित है:

तिथि: January 3, 2026 दिन: Saturday समय: इस उत्सव को आने में अब केवल 0 दिन शेष हैं।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस्लामी दिन सूर्यास्त से शुरू होते हैं, इसलिए उत्सव की धार्मिक गतिविधियां अक्सर January 3, 2026 की पूर्व संध्या से ही प्रारंभ हो जाती हैं। भारत में, इस दिन को एक 'प्रतिबंधित अवकाश' (Restricted Holiday) के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिसका अर्थ है कि यह सरकारी कार्यालयों के लिए वैकल्पिक अवकाश होता है।

हज़रत अली का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

हज़रत अली का जन्म लगभग 600 ईस्वी में हुआ था। उनके पिता अबू तालिब पैगंबर मोहम्मद के चाचा थे और उन्होंने ही पैगंबर साहब का पालन-पोषण किया था। अली बचपन से ही पैगंबर साहब के सानिध्य में रहे, जिससे उनके चरित्र पर पैगंबर की शिक्षाओं का गहरा प्रभाव पड़ा। वे इस्लाम स्वीकार करने वाले पहले युवा पुरुष थे।

काबा में जन्म की विशेषता

इस्लामी इतिहास में यह दर्ज है कि जब अली की माता, फातिमा बिंत असद, प्रसव पीड़ा में थीं, तो काबा की दीवार चमत्कारिक रूप से फट गई और वे उसके भीतर प्रविष्ट हुईं। तीन दिनों के बाद, वे अपनी गोद में एक दिव्य बालक को लेकर बाहर आईं। यह घटना अली के आध्यात्मिक गौरव और ईश्वर के प्रति उनकी निकटता को दर्शाती है। आज भी, दुनिया भर के मुसलमान इस स्थान को अत्यंत श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं।

ज्ञान और न्याय के प्रतीक

पैगंबर मोहम्मद ने एक प्रसिद्ध हदीस में कहा था, "मैं ज्ञान का शहर हूँ और अली उसका द्वार है।" यह कथन अली की बौद्धिक क्षमता को प्रमाणित करता है। उन्होंने दर्शन, खगोल विज्ञान, व्याकरण और कानून जैसे विषयों में अमूल्य योगदान दिया। उनके शासनकाल के दौरान, उन्होंने एक ऐसी न्याय प्रणाली स्थापित की जहाँ एक साधारण नागरिक भी खलीफा (शासक) से प्रश्न पूछ सकता था। उनकी पुस्तक 'नहजुल बलागा' (बलिष्ठता का मार्ग) में संकलित उनके भाषण, पत्र और उपदेश आज भी शासनकला और नैतिकता के उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं।

शिया और सुन्नी दृष्टिकोण

हज़रत अली का स्थान इस्लाम के दोनों प्रमुख संप्रदायों में अत्यंत ऊंचा है। शिया मुसलमान उन्हें पैगंबर मोहम्मद का वास्तविक उत्तराधिकारी और पहला 'इमाम' मानते हैं। उनके लिए, अली की विलादत (जन्म) और शहादत (बलिदान) उनके विश्वास के केंद्र में हैं। वहीं, सुन्नी मुसलमान उन्हें 'खुलाफा-ए-राशिदुन' (चार न्यायप्रिय खलीफाओं) में से चौथे खलीफा के रूप में सम्मान देते हैं और उन्हें 'असदउल्लाह' (ईश्वर का शेर) की उपाधि से नवाजते हैं।

भारत में उत्सव की परंपराएं और रीति-रिवाज

भारत अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, और हज़रत अली का जन्मदिन मनाने का तरीका भी यहाँ की स्थानीय संस्कृति में रचा-बसा है। देश के विभिन्न शहरों जैसे लखनऊ, हैदराबाद, दिल्ली और मुंबई में इस दिन की रौनक देखते ही बनती है।

मस्जिदों और इमामबाड़ों की सजावट

उत्सव की तैयारी कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। मस्जिदों, इमामबाड़ों और दरगाहों को सुंदर रोशनी, फूलों और झंडों से सजाया जाता है। विशेष रूप से लखनऊ के 'बड़ा इमामबाड़ा' और 'छोटा इमामबाड़ा' इस दिन रोशनी से नहा उठते हैं। घरों में भी सफाई की जाती है और दीये जलाए जाते हैं।

धार्मिक सभाएं और महफिलें

इस दिन का मुख्य आकर्षण 'महफिल' और 'मजलिस' होती हैं। इन सभाओं में विद्वान और धर्मगुरु हज़रत अली के जीवन, उनकी बहादुरी के किस्सों और उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हैं। लोग बड़ी संख्या में इन सभाओं में शामिल होकर उनके प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।

कव्वाली और नात-ख्वानी

भारत में सूफी संगीत का एक लंबा इतिहास रहा है। हज़रत अली के जन्मदिन पर कव्वाली का विशेष महत्व है। 'मन कुंतो मौला, फा हाज़ा अली-उन मौला' (जिसका मैं मौला हूँ, उसके अली मौला हैं) जैसी प्रसिद्ध कव्वालियां दरगाहों और महफिलों में गाई जाती हैं। ये गीत न केवल धार्मिक होते हैं, बल्कि सुनने वालों को एक रूहानी सुकून भी प्रदान करते हैं।

दान और परोपकार (नज़्र-ओ-नियाज़)

हज़रत अली हमेशा गरीबों और अनाथों की मदद के लिए तत्पर रहते थे। उनकी इसी परंपरा को याद करते हुए, उनके जन्मदिन पर बड़े पैमाने पर लंगर (सामुदायिक भोजन) का आयोजन किया जाता है। गरीबों को भोजन कराया जाता है, कपड़े बांटे जाते हैं और आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। घरों में विशेष पकवान जैसे 'पुलाव', 'ज़र्दा' और 'खीर' बनाई जाती है, जिसे 'नियाज़' के रूप में पड़ोसियों और रिश्तेदारों में बांटा जाता है।

बच्चों के लिए शिक्षा

इस दिन को एक शैक्षिक अवसर के रूप में भी देखा जाता है। कई मदरसों और स्कूलों में हज़रत अली के जीवन पर आधारित भाषण और कविता प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, ताकि युवा पीढ़ी उनके न्याय और ज्ञान के सिद्धांतों को समझ सके।

हज़रत अली की शिक्षाएं और समकालीन प्रासंगिकता

आज के आधुनिक युग में, जहाँ समाज अक्सर संघर्ष और विभाजन का सामना करता है, हज़रत अली की शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।

  1. न्याय और समानता: हज़रत अली का मानना था कि एक शासन तभी स्थिर रह सकता है जब वह न्याय पर आधारित हो। उन्होंने कहा था, "कुफ्र (अविश्वास) के साथ राज्य चल सकता है, लेकिन अन्याय के साथ नहीं।" यह सिद्धांत आज के लोकतंत्र और मानवाधिकारों की आधारशिला है।
  2. मानवता की सेवा: उन्होंने अपने गवर्नरों को निर्देश दिया था कि वे लोगों के साथ दया का व्यवहार करें, चाहे वे उनके धर्म के हों या न हों। उन्होंने प्रसिद्ध रूप से कहा था, "लोग या तो धर्म में तुम्हारे भाई हैं या मानवता में तुम्हारे समान।" यह संदेश वैश्विक भाईचारे का सबसे बड़ा उदाहरण है।
  3. ज्ञान की खोज: अली ने हमेशा शिक्षा और ज्ञान को धन से ऊपर रखा। उनके अनुसार, "ज्ञान धन से बेहतर है, क्योंकि ज्ञान तुम्हारी रक्षा करता है और तुम्हें धन की रक्षा करनी पड़ती है।"
  4. क्षमा और धैर्य: युद्ध के मैदान में भी अली ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। वे अपने शत्रुओं के प्रति भी दयालु थे और उन्होंने कभी भी निहत्थे पर वार नहीं किया।

भारत में अवकाश की स्थिति

हज़रत अली का जन्मदिन भारत में एक प्रतिबंधित अवकाश (Restricted Holiday) के रूप में वर्गीकृत है। इसका मतलब है कि यह राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) नहीं है, जहाँ सभी सरकारी कार्यालय अनिवार्य रूप से बंद रहते हैं। इसके बजाय, सरकारी कर्मचारी अपनी पसंद के अनुसार वर्ष के दौरान मिलने वाले सीमित प्रतिबंधित अवकाशों में से इसे चुन सकते हैं।

बैंक और स्कूल: अधिकांश बैंक और शैक्षणिक संस्थान इस दिन खुले रहते हैं, हालाँकि कुछ मुस्लिम बहुल इलाकों या विशिष्ट संस्थानों में छुट्टी हो सकती है। सार्वजनिक परिवहन: बसें, ट्रेनें और मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती हैं। बाजार: बाजार और दुकानें खुली रहती हैं, लेकिन मुस्लिम क्षेत्रों में उत्सव के कारण शाम के समय काफी भीड़ हो सकती है और कुछ दुकानें बंद रह सकती हैं।

उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में, जहाँ मुस्लिम जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा रहता है, इस दिन का सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव बहुत अधिक होता है। लखनऊ जैसे शहरों में तो इस दिन भव्य जुलूस भी निकाले जाते हैं, जिससे यातायात में कुछ बदलाव हो सकते हैं।

निष्कर्ष

हज़रत अली का जन्मदिन केवल एक ऐतिहासिक घटना का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन शाश्वत मूल्यों का उत्सव है जो मानवता को श्रेष्ठ बनाते हैं। भारत में, यह दिन विभिन्न समुदायों के बीच प्रेम, सम्मान और आपसी समझ को बढ़ावा देता है। हज़रत अली का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची शक्ति शारीरिक बल में नहीं, बल्कि चरित्र की शुद्धता और न्याय के प्रति अडिग रहने में है।

2026 में, जब हम January 3, 2026 को हज़रत अली की जयंती मनाएंगे, तो यह हमारे लिए एक अवसर होगा कि हम उनके द्वारा दिखाए गए शांति, सहिष्णुता और ज्ञान के मार्ग पर चलने का पुनः संकल्प लें। उनके उपदेशों की रोशनी में, हम एक ऐसे समाज का निर्माण करने की दिशा में बढ़ सकते हैं जहाँ न्याय और करुणा सर्वोपरि हो।

हज़रत अली के जन्मदिन की यह व्यापक मार्गदर्शिका हमें उनके महान व्यक्तित्व की याद दिलाती है और हमें प्रेरित करती है कि हम भी अपने जीवन में सत्य और न्याय के प्रति समर्पित रहें। इस पावन अवसर पर, भारत का हर कोना उनकी याद में रोशन होता है और उनकी अमर विरासत को नमन करता है।

Frequently Asked Questions

Common questions about Hazarat Ali's Birthday in India

भारत में वर्ष 2026 में हज़रत अली का जन्मदिन January 3, 2026 को मनाया जाएगा, जो कि Saturday का दिन है। इस पवित्र अवसर के आने में अब केवल 0 दिन शेष हैं। यह दिन इस्लामी कैलेंडर के रजब महीने की 13वीं तारीख को पड़ता है, जो पैगंबर मोहम्मद के चचेरे भाई और दामाद, इमाम अली इब्न अबू तालिब की जयंती का प्रतीक है।

नहीं, हज़रत अली का जन्मदिन भारत में एक प्रतिबंधित अवकाश (Restricted Holiday) माना जाता है। इसका अर्थ है कि सरकारी कार्यालय और स्कूल सामान्य रूप से खुले रहते हैं, लेकिन कर्मचारी अपनी इच्छा के अनुसार इस दिन छुट्टी लेने का विकल्प चुन सकते हैं। यह मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय, विशेष रूप से शिया मुसलमानों द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जबकि देश भर में इसकी धार्मिक मान्यता है।

हज़रत अली पैगंबर मोहम्मद के चचेरे भाई और दामाद थे। उन्हें इस्लाम स्वीकार करने वाला पहला युवा पुरुष माना जाता है। शिया मुसलमान उन्हें पहले इमाम के रूप में पूजते हैं, जबकि सुन्नी मुसलमान उन्हें चौथे 'खलीफा' के रूप में सम्मान देते हैं। उनके जन्म की सबसे विशेष बात यह है कि उनका जन्म मक्का में पवित्र काबा के भीतर हुआ था, जो इस्लामी इतिहास में एक अद्वितीय घटना है। यह दिन उनके न्याय, ज्ञान और वीरता के सिद्धांतों को याद करने के लिए मनाया जाता है।

भारत में इस उत्सव को 'जश्न-ए-विलादत' या 'यौम-ए-अली' के रूप में मनाया जाता है। लोग विशेष प्रार्थनाओं के लिए मस्जिदों में इकट्ठा होते हैं और मस्जिदों को सुंदर रोशनी से सजाया जाता है। धार्मिक सभाओं में इमाम अली के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर चर्चा की जाती है। कव्वाली और भक्ति संगीत के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। परिवार और दोस्त एक साथ मिलकर भोजन करते हैं और गरीबों को दान देकर खुशी साझा करते हैं।

इस्लामी परंपरा के अनुसार, हज़रत अली का जन्म 600 ईस्वी में मक्का की पवित्र मस्जिद, काबा के अंदर हुआ था। उन्हें इतिहास में एकमात्र ऐसा व्यक्ति माना जाता है जिसका जन्म इस्लाम के इस सबसे पवित्र स्थल के भीतर हुआ है। यही कारण है कि उनके जन्मदिन का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है, और भक्त इस दिन को एक चमत्कारिक और आध्यात्मिक घटना के रूप में देखते हैं।

इस दिन विशेष रूप से सामुदायिक भोज का आयोजन किया जाता है। कई जगहों पर 'लंगर' या 'नयाज़' (प्रसाद) बांटा जाता है। लोग अपने घरों में मीठे व्यंजन बनाते हैं और पड़ोसियों के साथ साझा करते हैं। मस्जिदों और इमामबाड़ों में सभाएं होती हैं जहाँ कवि और वक्ता हज़रत अली की प्रशंसा में कविताएं और भाषण पढ़ते हैं, जिन्हें 'मनकबत' कहा जाता है। यह दिन एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने का प्रतीक है।

यदि आप इस दिन भारत में हैं, तो आपको लखनऊ, हैदराबाद या दिल्ली जैसे शहरों के मुस्लिम बहुल इलाकों में जाना चाहिए जहाँ उत्सव की रौनक देखने लायक होती है। आगंतुकों को सलाह दी जाती है कि वे मस्जिदों या धार्मिक स्थलों पर जाते समय शालीन कपड़े पहनें और स्थानीय परंपराओं का सम्मान करें। आप सार्वजनिक सभाओं में शामिल होकर सुंदर कव्वाली का आनंद ले सकते हैं और इस समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को करीब से देख सकते हैं।

हज़रत अली को उनकी बुद्धिमत्ता, न्यायप्रियता और सच्चाई के लिए जाना जाता है। उनकी शिक्षाएं सत्य, न्याय और मानवाधिकारों के संरक्षण पर जोर देती हैं। भारत में इस दिन का आयोजन युवा पीढ़ी को उनके दर्शन, शासन कला और नैतिकता के बारे में शिक्षित करने का एक अवसर प्रदान करता है। उनके विचार आज भी समाज में शांति, धैर्य और निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा देते हैं।

Historical Dates

Hazarat Ali's Birthday dates in India from 2010 to 2025

Year Day of Week Date
2025 Tuesday January 14, 2025
2024 Thursday January 25, 2024
2023 Sunday February 5, 2023
2022 Tuesday February 15, 2022
2021 Friday February 26, 2021
2020 Monday March 9, 2020
2019 Thursday March 21, 2019
2018 Sunday April 1, 2018
2017 Tuesday April 11, 2017
2016 Thursday April 21, 2016
2015 Sunday May 3, 2015
2014 Tuesday May 13, 2014
2013 Friday May 24, 2013
2012 Monday June 4, 2012
2011 Thursday June 16, 2011
2010 Saturday June 26, 2010

Note: Holiday dates may vary. Some holidays follow lunar calendars or have different observance dates. Purple indicates weekends.