Maha Shivaratri/Shivaratri

India • February 15, 2026 • Sunday

43
Days
16
Hours
22
Mins
45
Secs
until Maha Shivaratri/Shivaratri
Asia/Kolkata timezone

Holiday Details

Holiday Name
Maha Shivaratri/Shivaratri
Country
India
Date
February 15, 2026
Day of Week
Sunday
Status
43 days away
Weekend
Falls on weekend
About this Holiday
Maha Shivratri is an annual festival dedicated to Shiva, the Hindu God of destruction. For devotees, is a day of reflection and meditation.

About Maha Shivaratri/Shivaratri

Also known as: महाशिवरात्रि

महा शिवरात्रि: भगवान शिव की आराधना का महापर्व

महा शिवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह आधात्मिक जागृति, आत्म-चिंतन और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। "महा शिवरात्रि" का शाब्दिक अर्थ है "शिव की महान रात"। शिव पुराण के अनुसार, यह वह समय है जब सृष्टि के रक्षक भगवान शिव ने ब्रह्मांड को विनाश से बचाने के लिए कालकूट विष का पान किया था, और यह वही रात है जब शिव और शक्ति (माता पार्वती) का दिव्य मिलन हुआ था।

योगिक परंपरा में, भगवान शिव को 'आदि गुरु' यानी पहले गुरु के रूप में पूजा जाता है, जिन्होंने मानवता को योग और ध्यान का ज्ञान दिया। महा शिवरात्रि के दिन ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार होती है कि मानव शरीर में ऊर्जा का प्राकृतिक प्रवाह ऊपर की ओर (ऊर्ध्वगामी) होने लगता है। यही कारण है कि इस रात को आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह रात हमें अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण पाने, अपने अहंकार को त्यागने और उस परम तत्व के साथ एकाकार होने का अवसर प्रदान करती है जो असीम और शाश्वत है।

इस पर्व का महत्व केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में जहाँ भी हिंदू समुदाय और भगवान शिव के अनुयायी रहते हैं, वहां इसे अपार श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह दिन वैराग्य और गृहस्थ जीवन के संतुलन का अद्भुत उदाहरण है, जहाँ शिव एक ओर महायोगी हैं और दूसरी ओर माता पार्वती के साथ एक आदर्श पति भी हैं।

2026 में महा शिवरात्रि कब है?

वर्ष 2026 में महा शिवरात्रि का पावन पर्व February 15, 2026 को मनाया जाएगा। इस वर्ष यह त्योहार Sunday के दिन पड़ रहा है।

महा शिवरात्रि आने में अब केवल 43 दिन शेष हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार, महा शिवरात्रि की तिथि हर साल बदलती रहती है क्योंकि यह चंद्र कैलेंडर पर आधारित होती है। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। हालांकि हर महीने की 14वीं तिथि (अमावस्या से एक दिन पहले) को 'शिवरात्रि' आती है, जिसे 'मासिक शिवरात्रि' कहा जाता है, लेकिन फाल्गुन मास की इस रात को 'महा शिवरात्रि' की संज्ञा दी गई है क्योंकि इसकी आध्यात्मिक और खगोलीय महत्ता सबसे अधिक होती है।

महा शिवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

महा शिवरात्रि के पीछे कई पौराणिक कथाएं और आध्यात्मिक कारण छिपे हैं, जो इस त्योहार को विशेष बनाते हैं:

1. शिव और शक्ति का विवाह

सबसे लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह पुरुष (शिव) और प्रकृति (शक्ति) के मिलन का उत्सव है। यह मिलन दर्शाता है कि ज्ञान और ऊर्जा मिलकर ही इस ब्रह्मांड का संचालन करते हैं।

2. शिव का तांडव नृत्य

कहा जाता है कि महा शिवरात्रि की रात को ही भगवान शिव ने 'आनंद तांडव' किया था, जो सृजन, संरक्षण और विनाश का ब्रह्मांडीय नृत्य है। यह नृत्य जीवन के निरंतर चक्र और परिवर्तनशीलता को दर्शाता है।

3. समुद्र मंथन और नीलकंठ

एक अन्य कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ, तो उसमें से 'हलाहल' नामक भयंकर विष निकला। इस विष में पूरी सृष्टि को नष्ट करने की शक्ति थी। संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को पी लिया और उसे अपने कंठ (गले) में रोक लिया। विष के कारण उनका गला नीला पड़ गया, जिससे उनका नाम 'नीलकंठ' पड़ा। इस उपकार के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए महा शिवरात्रि मनाई जाती है।

4. आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, इस रात उत्तरी गोलार्ध में ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि मनुष्य के भीतर की ऊर्जा स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर बढ़ती है। इसलिए, आध्यात्मिक गुरु इस रात को रीढ़ की हड्डी को सीधा रखकर जागते रहने (जागरण) की सलाह देते हैं ताकि इस प्राकृतिक ऊर्जा प्रवाह का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।

महा शिवरात्रि की परंपराएं और उत्सव

भारत के विभिन्न हिस्सों में महा शिवरात्रि को मनाने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन श्रद्धा और भक्ति का भाव एक समान रहता है।

1. उपवास (व्रत)

महा शिवरात्रि पर व्रत रखने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। श्रद्धालु पूरे दिन निराहार रहते हैं या केवल फलाहार करते हैं। व्रत का उद्देश्य शरीर का शुद्धिकरण और मन की एकाग्रता को बढ़ाना है। मान्यता है कि सच्चे मन से व्रत रखने से व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

2. अभिषेक और पूजा

शिवलिंग की पूजा इस दिन का मुख्य आकर्षण होती है। भक्त मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करते हैं। इसके साथ ही भगवान शिव की प्रिय वस्तुएं जैसे बेलपत्र, धतूरा, भांग और बेर अर्पित किए जाते हैं। बेलपत्र के तीन पत्ते त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का प्रतीक माने जाते हैं।

3. रात्रि जागरण

"शिवरात्रि" का अर्थ ही है शिव की रात। इसलिए, इस त्योहार में रात भर जागने का विशेष महत्व है। मंदिरों में चारों प्रहर की पूजा की जाती है। भक्त रात भर भजन, कीर्तन, 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ करते हैं।

4. निशिता काल पूजा

महा शिवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण पूजा 'निशिता काल' में होती है, जो आधी रात का समय होता है। माना जाता है कि इसी समय भगवान शिव पृथ्वी पर लिंग रूप में प्रकट हुए थे। 2026 में निशिता काल का समय मध्यरात्रि के आसपास होगा, जो गहन ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

5. विशेष परिधान

परंपरागत रूप से, इस दिन भक्त हरे रंग के वस्त्र पहनना पसंद करते हैं, क्योंकि हरा रंग प्रकृति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। उत्तर भारत और विशेष रूप से दक्षिण भारत के लिंगायत समुदायों में, इस दिन अपने गुरुओं को उपहार देने की भी परंपरा है।

भारत के प्रमुख शिव मंदिरों में उत्सव

यूं तो महा शिवरात्रि पूरे भारत में मनाई जाती है, लेकिन कुछ स्थानों पर इसका वैभव देखने लायक होता है:

वाराणसी (काशी): भगवान शिव की नगरी काशी में महा शिवरात्रि का उत्सव सबसे भव्य होता है। यहाँ बाबा विश्वनाथ के मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। पूरी नगरी 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठती है। उज्जैन: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में शिवरात्रि पर विशेष 'भस्म आरती' की जाती है और भगवान का अद्भुत श्रृंगार होता है। मंडी (हिमाचल प्रदेश): यहाँ का 'अंतर्राष्ट्रीय महा शिवरात्रि मेला' विश्व प्रसिद्ध है, जहाँ आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय देवता शिव को नमन करने आते हैं। ईशा योग केंद्र (कोयंबटूर): सद्गुरु जग्गी वासुदेव के सानिध्य में यहाँ रात भर चलने वाला संगीत, नृत्य और ध्यान का कार्यक्रम लाखों लोगों को आकर्षित करता है। पशुपतिनाथ (नेपाल): भारत के पड़ोसी देश नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में भी भारत और दुनिया भर से साधु-संत और भक्त इस दिन एकत्रित होते हैं।

महा शिवरात्रि के लाभ

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति महा शिवरात्रि का पालन पूर्ण निष्ठा के साथ करता है, उसे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  1. पापों से मुक्ति: अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है।
  2. मानसिक शांति: ध्यान और मंत्र जप से तनाव कम होता है और मानसिक स्पष्टता आती है।
  3. स्वास्थ्य और समृद्धि: भगवान शिव के आशीर्वाद से आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
  4. आध्यात्मिक प्रगति: यह रात साधकों के लिए अपनी चेतना को ऊंचे स्तर पर ले जाने का द्वार खोलती है।

क्या महा शिवरात्रि पर सार्वजनिक अवकाश होता है?

महा शिवरात्रि भारत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। यद्यपि यह पूरे भारत में एक अनिवार्य राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश (जैसे गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस) नहीं है, लेकिन भारत के अधिकांश राज्यों में इस दिन सरकारी अवकाश घोषित किया जाता है।

स्कूल और कार्यालय: उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई राज्यों में स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय इस दिन बंद रहते हैं। बाजार और व्यापार: अधिकांश बाजार खुले रहते हैं, लेकिन मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों में भारी भीड़ के कारण यातायात में बदलाव किया जा सकता है। सार्वजनिक परिवहन: बसें और ट्रेनें चलती रहती हैं, लेकिन प्रमुख तीर्थ स्थलों की ओर जाने वाली गाड़ियों में बहुत भीड़ हो सकती है।

कुल मिलाकर, महा शिवरात्रि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का एक जीवंत हिस्सा है। यह हमें सिखाती है कि शांति और स्थिरता हमारे भीतर ही है, बस हमें उस 'शिव तत्व' को पहचानने की आवश्यकता है। चाहे आप एक भक्त हों, एक साधक हों, या केवल भारतीय संस्कृति को जानने के इच्छुक व्यक्ति, महा शिवरात्रि का अनुभव आपको एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है।

2026 की महा शिवरात्रि आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। हर-हर महादेव!

Frequently Asked Questions

Common questions about Maha Shivaratri/Shivaratri in India

वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि Sunday, February 15, 2026 को मनाई जाएगी। आज से इस पावन पर्व के आने में लगभग 43 दिन शेष हैं। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है, जिसे साल की सबसे अंधेरी रात माना जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय ऊर्जा के प्राकृतिक उछाल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नहीं, महाशिवरात्रि भारत में पूरे देश के लिए एक अनिवार्य राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश नहीं है, लेकिन यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव है। भारत के अधिकांश राज्यों और नेपाल में इस दिन सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और कई व्यवसायों में छुट्टी रहती है। इस दिन देशभर के मंदिरों और तीर्थस्थलों पर लाखों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, विशेष रूप से भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख शिवालयों में विशेष प्रबंध किए जाते हैं।

महाशिवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है 'शिव की महान रात'। यह त्योहार भगवान शिव की कृपा और उनके आदि गुरु (प्रथम गुरु) स्वरूप का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी रात भगवान शिव ने सृष्टि के संरक्षण के लिए विषपान किया था और माता पार्वती के साथ उनका पुनर्मिलन हुआ था। साथ ही, यह शिव के तांडव नृत्य का भी प्रतीक है। आध्यात्मिक रूप से, इस रात ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है जो मनुष्य की आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने में सहायक मानी जाती है।

महाशिवरात्रि पर सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान 'महा पूजा' है, जो वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार की जाती है। इसमें शिव लिंग का अभिषेक, रुद्रम का पाठ, मंत्रोच्चार और आरती शामिल है। पूजा के लिए 'निशिता काल' यानी मध्यरात्रि का समय सबसे शुभ माना जाता है, जो 2026 में 16 फरवरी को रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक रहेगा। भक्त पूरी रात जागकर भजन-कीर्तन करते हैं और शिव की कहानियाँ सुनते हैं, जिसे आध्यात्मिक प्रगति के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है।

महाशिवरात्रि पर भक्त पूरे दिन का कड़ा उपवास रखते हैं। परंपरा के अनुसार, उत्सव से एक दिन पहले भक्त केवल एक बार भोजन करते हैं। शिवरात्रि के दिन सुबह के अनुष्ठान के बाद, भक्त भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूर्ण उपवास का संकल्प लेते हैं। यह उपवास न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि मन को एकाग्र करने और इच्छा, क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या जैसी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण पाने में भी मदद करता है।

महाशिवरात्रि की रात को पूरी तरह जागते हुए और सीधे बैठकर (रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर) बिताने का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस रात ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण मानव शरीर में ऊर्जा का प्रवाह ऊपर की ओर होता है। जागरण के दौरान ध्यान और प्रार्थना करने से शारीरिक और मानसिक कल्याण होता है। यह रात अज्ञानता के अंधकार को दूर करने और जीवन में आध्यात्मिक प्रकाश लाने का प्रतीक है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्त पारंपरिक रूप से हरे रंग के कपड़े पहनना पसंद करते हैं, क्योंकि इस रंग को अत्यंत शुभ माना जाता है। दक्षिण भारत के लिंगायत समुदायों में, सदस्य इस दिन अपने गुरुओं या आध्यात्मिक मार्गदर्शकों को उपहार देने की परंपरा का पालन करते हैं। मंदिरों में भक्त दूध, शहद, बेल पत्र और जल के साथ शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। यह दिन दान-पुण्य और योग साधना के लिए भी श्रेष्ठ माना जाता है।

यदि आप महाशिवरात्रि पर किसी प्रसिद्ध मंदिर जैसे वाराणसी के काशी विश्वनाथ या नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर जाने की योजना बना रहे हैं, तो भारी भीड़ के लिए तैयार रहें। दर्शन के लिए लंबी कतारें हो सकती हैं, इसलिए सुबह जल्दी पहुँचना उचित रहता है। स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करें और शालीन पारंपरिक कपड़े पहनें। मंदिरों के पास विशेष मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जो भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को समझने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं।

Historical Dates

Maha Shivaratri/Shivaratri dates in India from 2010 to 2025

Year Day of Week Date
2025 Wednesday February 26, 2025
2024 Friday March 8, 2024
2023 Saturday February 18, 2023
2022 Tuesday March 1, 2022
2021 Thursday March 11, 2021
2020 Friday February 21, 2020
2019 Monday March 4, 2019
2018 Tuesday February 13, 2018
2017 Friday February 24, 2017
2016 Monday March 7, 2016
2015 Tuesday February 17, 2015
2014 Thursday February 27, 2014
2013 Sunday March 10, 2013
2012 Monday February 20, 2012
2011 Wednesday March 2, 2011
2010 Friday February 12, 2010

Note: Holiday dates may vary. Some holidays follow lunar calendars or have different observance dates. Purple indicates weekends.