March Equinox

India • March 20, 2026 • Friday

76
Days
16
Hours
23
Mins
30
Secs
until March Equinox
Asia/Kolkata timezone

Holiday Details

Holiday Name
March Equinox
Country
India
Date
March 20, 2026
Day of Week
Friday
Status
76 days away
About this Holiday
March Equinox in India (New Delhi)

About March Equinox

Also known as: वसंत विषुव

मार्च विषुव (March Equinox): भारत में वसंत के आगमन का खगोलीय उत्सव

मार्च विषुव, जिसे हिंदी में 'बसंत संपात' या 'वसंत विषुव' के रूप में भी जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है जो पृथ्वी के अपनी धुरी पर झुकाव और सूर्य के चारों ओर इसकी परिक्रमा का परिणाम है। यह वह क्षण है जब सूर्य सीधे भूमध्य रेखा के ऊपर होता है, जिससे पूरी दुनिया में दिन और रात की लंबाई लगभग बराबर हो जाती है। भारत जैसे विविध जलवायु वाले देश में, यह घटना सर्दियों की विदाई और वसंत ऋतु के आधिकारिक आगमन का संकेत देती है। हालांकि यह कोई धार्मिक त्योहार नहीं है, लेकिन इसका वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है।

भारत में मार्च विषुव का अनुभव उत्तर से दक्षिण तक अलग-अलग होता है। उत्तर भारत में, जहाँ कड़ाके की ठंड पड़ती है, विषुव का समय सुहावने मौसम की शुरुआत लेकर आता है। पेड़ों पर नई पत्तियां आने लगती हैं और प्रकृति फूलों से लद जाती है। खगोलीय दृष्टि से, यह वह समय है जब सूर्य दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध की ओर प्रवेश करता है, जिसे 'उत्तरायण' की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा सकता है, हालांकि पारंपरिक मकर संक्रांति से इसका खगोलीय संरेखण अब बदल चुका है।

यह दिन संतुलन का प्रतीक है। जब सूर्य खगोलीय भूमध्य रेखा को पार करता है, तो पृथ्वी के दोनों गोलार्धों को समान मात्रा में प्रकाश प्राप्त होता है। भारत में, जहाँ प्राचीन काल से ही खगोल विज्ञान (ज्योतिष शास्त्र) का गहरा प्रभाव रहा है, इस दिन को प्रकृति के चक्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि ब्रह्मांड नियमों से बंधा है और हर ऋतु का अपना एक निश्चित समय और महत्व है।

2026 में मार्च विषुव कब है?

वर्ष 2026 में, मार्च विषुव की खगोलीय घटना Friday, March 20, 2026 को होगी। नई दिल्ली, भारत के समय के अनुसार, यह क्षण रात को 8:14 PM IST पर घटित होगा।

इस महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के आने में अब केवल 76 दिन शेष हैं।

मार्च विषुव की तिथि हर साल थोड़ी बदलती रहती है, आमतौर पर यह 19, 20 या 21 मार्च को पड़ता है। इसका मुख्य कारण ग्रेगोरियन कैलेंडर (365 दिन) और पृथ्वी के वास्तविक सौर वर्ष (लगभग 365.24 दिन) के बीच का अंतर है। लीप वर्ष इस अंतर को संतुलित करने में मदद करते हैं, लेकिन फिर भी समय में कुछ मिनटों या घंटों का हेरफेर होता रहता है। 2026 एक लीप वर्ष नहीं है, इसलिए यह 20 मार्च को ही मनाया जाएगा।

मार्च विषुव का वैज्ञानिक और खगोलीय महत्व

खगोल विज्ञान के अनुसार, विषुव (Equinox) शब्द लैटिन शब्द 'Aequus' (बराबर) और 'Nox' (रात) से बना है। मार्च विषुव के दौरान, पृथ्वी की धुरी न तो सूर्य की ओर झुकी होती है और न ही उससे दूर। इसके परिणामस्वरूप, सूर्य की किरणें सीधे भूमध्य रेखा पर पड़ती हैं।

भारत में दिन और रात की स्थिति: भारत के संदर्भ में, 20 मार्च, 2026 को सूर्योदय लगभग सुबह 6:25 बजे और सूर्यास्त शाम 6:32 बजे होगा। हालांकि 'विषुव' का अर्थ बराबर दिन-रात है, लेकिन वायुमंडलीय अपवर्तन (Atmospheric Refraction) के कारण दिन की लंबाई रात से कुछ मिनट अधिक महसूस हो सकती है।

अयन और विषुव: पृथ्वी की कक्षा में दो विषुव (मार्च और सितंबर) और दो संक्रांतियां (जून और दिसंबर) होती हैं। मार्च विषुव के बाद, उत्तरी गोलार्ध (जिसमें भारत स्थित है) सूर्य की ओर अधिक झुकना शुरू कर देता है, जिससे दिन लंबे होने लगते हैं और गर्मी बढ़ने लगती है।

भारत में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ

भारत का प्राचीन विज्ञान और संस्कृति खगोलीय घटनाओं के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। प्राचीन भारतीय खगोलविदों, जैसे आर्यभट्ट और वराहमिहिर, को विषुव की सटीक गणना का ज्ञान था।

बसंत संपात और भारतीय कैलेंडर: हिंदू ज्योतिष में, मार्च विषुव को 'वसंत संपात' कहा जाता है। ऐतिहासिक रूप से, यह मेष संक्रांति के साथ मेल खाता था, लेकिन 'अयनांश' (Precession of Equinoxes) या पृथ्वी की धुरी के डगमगाने के कारण, अब ये दोनों घटनाएं अलग-अलग समय पर होती हैं। वर्तमान में, मेष संक्रांति (सौर नव वर्ष) अप्रैल के मध्य में मनाई जाती है, जबकि खगोलीय विषुव मार्च में होता है।

भारतीय राष्ट्रीय पंचांग (Saka Calendar): भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर, जिसे शक संवत कहा जाता है, मार्च विषुव के चक्र पर आधारित है। शक कैलेंडर का पहला महीना 'चैत्र' होता है, जो सामान्य वर्ष में 22 मार्च को और लीप वर्ष में 21 मार्च को शुरू होता है। इस प्रकार, मार्च विषुव भारत के आधिकारिक कैलेंडर के नए साल की शुरुआत के बहुत करीब है।

सांस्कृतिक मान्यताएं: यद्यपि मार्च विषुव पर कोई बड़ा सार्वजनिक उत्सव नहीं होता, लेकिन यह समय भारत के कई वसंतकालीन त्योहारों की पृष्ठभूमि तैयार करता है। उदाहरण के लिए, होली का त्योहार, जो फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है, अक्सर मार्च विषुव के आसपास ही पड़ता है। होली बुराई पर अच्छाई की जीत और वसंत के स्वागत का प्रतीक है। हालांकि होली चंद्र कैलेंडर पर आधारित है और विषुव सौर घटना है, दोनों ही प्रकृति के पुनर्जन्म का जश्न मनाते हैं।

भारत में अवलोकन और गतिविधियाँ

भारत में खगोल विज्ञान के प्रति उत्साही लोगों और आम जनता के लिए मार्च विषुव एक विशेष अनुभव हो सकता है।

  1. जंतर मंतर पर अवलोकन:
दिल्ली और जयपुर जैसे शहरों में स्थित 'जंतर मंतर' वेधशालाएं मार्च विषुव को देखने के लिए सर्वोत्तम स्थान हैं। महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित ये प्राचीन यंत्र आज भी विषुव की सटीक गणना करने में सक्षम हैं। यहाँ के सम्राट यंत्र और राम यंत्र के माध्यम से सूर्य की स्थिति और छाया के छोटे होते आकार को देखना एक अद्भुत अनुभव होता है।
  1. सूर्य मंदिरों का महत्व:
ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर और गुजरात का मोढेरा सूर्य मंदिर इस तरह से बनाए गए हैं कि विषुव के दिन सूर्य की पहली किरणें गर्भगृह या विशेष नक्काशीदार स्तंभों पर पड़ती हैं। हालांकि ये घटनाएं अक्सर संक्रांति के लिए अधिक प्रसिद्ध हैं, लेकिन विषुव के दौरान भी यहाँ की वास्तुकला की सटीकता देखने लायक होती है।
  1. शैक्षणिक कार्यक्रम:
भारत के विभिन्न तारामंडलों (Planetariums) और विज्ञान केंद्रों में इस दिन विशेष शो और कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। छात्रों को पृथ्वी की गति, मौसम परिवर्तन और खगोल विज्ञान के बारे में शिक्षित किया जाता है।
  1. योग और ध्यान:
चूंकि यह दिन संतुलन (Balance) का प्रतीक है, इसलिए भारत में कई योग केंद्रों और आध्यात्मिक संस्थाओं में विशेष ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं। 'समान दिन और समान रात' की अवधारणा को मन और शरीर के संतुलन के रूप में देखा जाता है।

मौसम और प्रकृति में बदलाव

मार्च विषुव भारत में मौसम के एक बड़े बदलाव का सूचक है।

उत्तर भारत: यहाँ कड़ाके की ठंड समाप्त हो जाती है। दिन का तापमान 25°C से 30°C के बीच रहने लगता है। सरसों के पीले फूल और टेसू (पलाश) के लाल फूल खिलने लगते हैं, जो भारतीय वसंत की पहचान हैं। दक्षिण भारत: दक्षिण भारत में विषुव के बाद गर्मी और उमस बढ़ने लगती है। चूंकि यह क्षेत्र भूमध्य रेखा के करीब है, यहाँ दिन-रात की लंबाई में बदलाव उत्तर भारत की तुलना में कम स्पष्ट होता है। कृषि: यह समय रबी की फसलों (जैसे गेहूं) की कटाई की तैयारी का होता है। किसानों के लिए यह एक व्यस्त लेकिन संतोषजनक समय होता है।

मार्च विषुव बनाम अन्य वसंत त्योहार

अक्सर लोग मार्च विषुव को अन्य क्षेत्रीय त्योहारों के साथ जोड़कर देखते हैं, लेकिन इनमें सूक्ष्म अंतर हैं:

होली: यह रंगों का त्योहार है जो मार्च में मनाया जाता है। यह विषुव के आसपास हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है। गुड़ी पड़वा और उगादि: ये क्रमशः महाराष्ट्र और कर्नाटक/आंध्र प्रदेश के नव वर्ष हैं। ये भी मार्च-अप्रैल में पड़ते हैं और वसंत ऋतु का स्वागत करते हैं। बैसाखी और विशु: ये अप्रैल के मध्य में मनाए जाने वाले सौर नव वर्ष हैं, जो प्राचीन काल में विषुव के साथ जुड़े थे, लेकिन अब नक्षत्रों की स्थिति बदलने के कारण आगे खिसक गए हैं।

क्या भारत में मार्च विषुव पर सार्वजनिक अवकाश होता है?

नहीं, मार्च विषुव भारत में कोई सार्वजनिक अवकाश या राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) नहीं है।

इस दिन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण व्यावहारिक जानकारी इस प्रकार है:

व्यवसाय और कार्यालय: सभी सरकारी कार्यालय, बैंक, निजी क्षेत्र की कंपनियां और व्यापारिक प्रतिष्ठान अपने सामान्य समय के अनुसार खुले रहते हैं। स्कूल और कॉलेज: शिक्षण संस्थान खुले रहते हैं। अक्सर स्कूलों में इस दिन को विज्ञान के पाठ के रूप में पढ़ाया जाता है। परिवहन: सार्वजनिक परिवहन (बसें, ट्रेनें, उड़ानें) सामान्य रूप से संचालित होती हैं। इस खगोलीय घटना के कारण यात्रा में कोई व्यवधान नहीं आता। पर्यटन: पर्यटकों के लिए यह भारत घूमने का एक बेहतरीन समय है क्योंकि मौसम सुहावना होता है। ऐतिहासिक स्थलों और स्मारकों पर कोई विशेष प्रतिबंध या भीड़भाड़ (विषुव के कारण) नहीं होती।

निष्कर्ष

मार्च विषुव एक ऐसा क्षण है जब विज्ञान और प्रकृति एक साथ मिलकर संतुलन की एक सुंदर तस्वीर पेश करते हैं। भारत में, भले ही इसे बड़े धूमधाम से न मनाया जाता हो, लेकिन इसकी उपस्थिति हमारे कैलेंडर, हमारी कृषि और हमारे बदलते मौसमों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम एक विशाल खगोलीय प्रणाली का हिस्सा हैं।

2026 में, जब आप March 20, 2026 को सूर्यास्त देखेंगे, तो याद रखें कि उस पल पूरी दुनिया आपके साथ समान मात्रा में प्रकाश और अंधकार साझा कर रही है। यह प्रकृति के साथ जुड़ने, अपने जीवन में संतुलन तलाशने और आने वाले गर्म दिनों के लिए खुद को तैयार करने का एक शानदार अवसर है। चाहे आप दिल्ली के जंतर मंतर पर हों या कन्याकुमारी के तट पर, मार्च विषुव का यह खगोलीय नृत्य हर भारतीय के लिए प्रकृति के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक मूक निमंत्रण है।

Frequently Asked Questions

Common questions about March Equinox in India

भारत में साल 2026 का मार्च विषुव March 20, 2026 को मनाया जाएगा, जो Friday के दिन पड़ रहा है। आज की तारीख से इस खगोलीय घटना के होने में अब केवल 76 दिन शेष बचे हैं। नई दिल्ली के समय के अनुसार, यह घटना रात 8:14 बजे (IST) घटित होगी, जब सूर्य खगोलीय भूमध्य रेखा को पार करेगा। इस समय दिन और रात की अवधि लगभग बराबर होती है, जिसमें सूर्योदय सुबह लगभग 6:25 बजे और सूर्यास्त शाम 6:32 बजे होता है।

नहीं, मार्च विषुव भारत में सार्वजनिक अवकाश नहीं है। यह एक खगोलीय घटना है, कोई धार्मिक या राष्ट्रीय त्योहार नहीं। इस दिन भारत भर में सभी सरकारी कार्यालय, स्कूल, कॉलेज और व्यावसायिक संस्थान सामान्य रूप से खुले रहते हैं। हालांकि यह उत्तरी गोलार्ध में वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है, लेकिन दैनिक जीवन, परिवहन या सार्वजनिक सेवाओं में इसके कारण कोई बदलाव या छुट्टियां नहीं होती हैं।

मार्च विषुव वह क्षण है जब पृथ्वी की धुरी का झुकाव और सूर्य के चारों ओर उसकी कक्षा इस प्रकार संरेखित होती है कि सूर्य सीधे भूमध्य रेखा के ऊपर होता है। इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी के दोनों गोलार्धों को समान मात्रा में प्रकाश मिलता है, जिससे दिन और रात लगभग 12-12 घंटे के बराबर हो जाते हैं। भारत के लिए, यह खगोलीय रूप से वसंत के आगमन का संकेत देता है। 2026 में, यह घटना वैश्विक स्तर पर 2:46 PM UTC पर होगी, जो भारतीय समयानुसार रात के समय पड़ती है।

हिंदू ज्योतिष में, मार्च विषुव को 'वसंत विषुव' या 'वसंत संपात' के रूप में जाना जाता है। ऐतिहासिक रूप से इसका बहुत महत्व रहा है, और भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर (शक संवत) भी इसी के आसपास 21 या 22 मार्च से शुरू होता है। हालांकि, अयनचलन (precession) के कारण, आधुनिक समय में मेष संक्रांति जैसे त्योहार अब अप्रैल के मध्य में चले गए हैं। यद्यपि इसे होली जैसे त्योहारों से जोड़ा जाता है, लेकिन होली चंद्र कैलेंडर पर आधारित होती है और इसका इस खगोलीय घटना से सीधा संबंध नहीं है।

भारत में मार्च विषुव के लिए कोई विशेष सार्वजनिक उत्सव, परेड या अनुष्ठान नहीं होते हैं। जापान जैसे देशों के विपरीत, जहाँ इस दिन पूर्वजों को याद किया जाता है, भारत में यह मुख्य रूप से खगोलविदों और विज्ञान प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय रहता है। कुछ योग उत्साही और आध्यात्मिक समूह इसे संतुलन और नवीनीकरण के प्रतीक के रूप में ध्यान लगाकर मना सकते हैं। सामान्य जनता के लिए, यह केवल मौसम में बदलाव और गर्मी की शुरुआत का एक संकेत मात्र होता है।

मार्च विषुव के समय भारत में वसंत का मौसम होता है, जो पर्यटन के लिए बहुत सुखद माना जाता है। उत्तर भारत में तापमान आमतौर पर 20°C से 30°C के बीच रहता है, जिससे मौसम सुहावना होता है और चारों ओर फूल खिलने लगते हैं। हालांकि, दक्षिण भारत में इस समय आर्द्रता और गर्मी बढ़ने लगती है। विषुव के बाद, दिन धीरे-धीरे लंबे होने लगते हैं और गर्मी का प्रकोप बढ़ना शुरू हो जाता है, जो आने वाले ग्रीष्मकाल का संकेत देता है।

पर्यटकों के लिए मार्च का समय भारत घूमने के लिए बेहतरीन है क्योंकि मौसम न तो बहुत ठंडा होता है और न ही बहुत गर्म। आप दिल्ली में इंडिया गेट जैसे खुले स्थानों या गोवा के समुद्र तटों पर जाकर दिन और रात की समानता का अनुभव कर सकते हैं। चूंकि यह कोई सार्वजनिक अवकाश नहीं है, इसलिए यात्रा, परिवहन या दर्शनीय स्थलों के खुलने के समय में कोई व्यवधान नहीं होता। कोणार्क सूर्य मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर जाकर सूर्य की स्थिति का अवलोकन करना एक अनूठा अनुभव हो सकता है।

हाँ, मार्च के महीने में होली जैसा प्रमुख त्योहार मनाया जाता है, लेकिन यह विषुव के साथ नहीं बल्कि चंद्र कैलेंडर के अनुसार होता है। इसके अलावा, विषुव के कुछ हफ्तों बाद अप्रैल के मध्य में बैसाखी, पुथंडु और विशु जैसे क्षेत्रीय नव वर्ष मनाए जाते हैं, जो सौर कैलेंडर के अनुसार मेष संक्रांति से जुड़े होते हैं। यदि आप विषुव के दौरान भारत में हैं, तो आप इन जीवंत सांस्कृतिक उत्सवों की तैयारियों और वसंत के आगमन का आनंद ले सकते हैं।

Historical Dates

March Equinox dates in India from 2010 to 2025

Year Day of Week Date
2025 Thursday March 20, 2025
2024 Wednesday March 20, 2024
2023 Tuesday March 21, 2023
2022 Sunday March 20, 2022
2021 Saturday March 20, 2021
2020 Friday March 20, 2020
2019 Thursday March 21, 2019
2018 Tuesday March 20, 2018
2017 Monday March 20, 2017
2016 Sunday March 20, 2016
2015 Saturday March 21, 2015
2014 Thursday March 20, 2014
2013 Wednesday March 20, 2013
2012 Tuesday March 20, 2012
2011 Monday March 21, 2011
2010 Saturday March 20, 2010

Note: Holiday dates may vary. Some holidays follow lunar calendars or have different observance dates. Purple indicates weekends.